बिहार विधान परिषद चुनाव में एनडींए का दबदबा. जनसुराज की धमक, 4 शिक्षक सीटों के सभी सीटिंग सदस्य हारे. कांग्रेस-सीपींआई हारी
अरुण कुमार पाण्डेय
पटना.28 बिहार विथान परिषद की 8 सीटों के चुनाव में आज वोटों की गिनती में सत्तारुढ़ एनडीए का दबदबा कायम रहा। 7 सीटों का दावेदार राजद ने पटना की शिक्षक सीट पर जीत दर्ज करने के साथ भाजपा का 30 वर्षों का किला ध्वस्त कर दिया है। इस बार के चुनाव में शिक्षक सीटों के सभी 4 सीटिंग सदस्य पराजित हो गये। 
प्रदेश की सियासत में तीसरा विकल्प बनने का दावा कर रही जनसुराज पार्टी की धमक रही। 
तिरहुत शिक्षक सीट भाजपा के नरेन्द्र प्रसाद सिंह ने भाकपा के संजय कुमार सिंह से छिन ली है। यह एनडीए को नतीजे में पहली जीत है।
 दरभंगा शिक्षक सीट   जनसुराज पार्टी के एस पी राय ने  कांग्रेस के मदन मोहन झा से छिन ली है। सारण शिक्षक सीट पर  जनसुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। निर्दलीय राहुल राज ने जदयू के आनंद पुष्कर को पछाड़ कर जीत दर्ज की है।  जनसुराज के अफाक अहमद सीटिंग सदस्य रहते पिछड़कर तीसरे स्थान पर हो गये।
  कोशी स्मातक सीट पर भाजपा  के एन के यादव का  कब्जा बरकरार रहा हैं। राजद के नीतेश यादव दूसरे और जनसुराज उम्मीदवार रजनीश रंजन तीसरे स्धान पर  रहे हैं।
पटना शिक्षक सीट पर कांटे की लड़ाई में  भाजपा के नवल किशोर यादव को   राजद के डा. संजीव कुमार सिंह ने पराजित कर दिया है। पहले से उनके भांई राजीव कुमार सिंह बेगूसराय स्थानीय निकाय क्षेत्र से कांग्रेस के ईकलौते सदस्य परिषद में सदस्य हैं।
पटना स्नातक सीट से कांटे की लडड़ांई में जदयू के नीरज कुमार ने राजद के दिलीप पटेल से  बढ़त कायम कर जीत प्राय: पक्की कर ली है। जन सुराज पार्टी के  अनुज कुमार सिंह तीसरे स्थान पर  रहे हैं।
तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय बंशीधर बृजवासी  फिर से जीत दर्ज की है। जदगू के अभिषेक झा से मुख्य मुकाबला रहा है।.दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा के सर्वेश कुमार का कब्जा कायम रहा। पिछली बार निर्दलीय जीते थे। 
इस बार के चुनाव में जनसुराज सभी 8,राजद 7,कांग्रेस 5, भाजपा-जदयू 4-4. भाकपा 2 और माले 1 सीट सहित कुल 150 उम्मीदवारों तथा 5.32 वोटर थे।
75 सदस्यीय मिधान परिषद में शिक्षक और स्नातक की 6-6 सीटें हैं। इस बार 4-4 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव हुए हैं। परिषद में विधायक कोटा की 27 स्थानीय प्राधिकार की 24 और राज्यपाल के मनोनयन कोटा की 12 सीटें है। प्राधिकार और मनोनयन कोटे की एकतिहांई सीटें प्रत्येक दो वर्षो पर खाली होने का सवैधानिक प्रावधान की अनदेखी हो रही है। एक साथ प्राधिकार क्षेत्र की सभी 24 सीटों के लिंए एक साथ चुनाव कराये जा रहें हैं। वही मनोनयन कोटा की 12 सीटें भी एक साथ भरी जा रही हैं।

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