पूर्व मंत्री श्रवण कुमार बने जदयू विधायक दल के नेता

पटना,21 अप्रैल। जदयू अध्यक्ष एव॔ सासंद नीतीश कुमार के भरोशे पर उतरे स्वजातीय गृह जिला नालंदा के श्रवम कुमार।
पूर्व मंत्री श्रवण कुमार बने जदयू विधायक दल के नेता ।
पार्टी विधायक दल ने सोमवार को नीतीश कुमार को नेता चयन के लिए किया था अधिकृत। शवण कुमार लंबे समय तक पार्टी के मुख्य सचेतक रहे हैं

 श्रवण कुमार के नाम की औपचारिक सूचना पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा द्वारा विधानसभा को भेजी गई थी।

विधानसभा सचिवालय ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी।
उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा जाने के बाद राज्य में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ है। इसके बाद ही जदयू विधायक दल के नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
श्रवण कुमार को बिहार की राजनीति का अनुभवी और जमीनी नेता माना जाता है। वह नालंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं और लंबे समय से जदयू का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जेपी आंदोलन से की थी
नालंदा के सासंद रहे जार्ज फर्नांडीस के समय श्वण उनके भरोसे के प्रतिनिध की अहम भूमिका निभाते रहे ।  बाद में नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में शामिल हो गए। राज्य सरकार में वह ग्रामीण विकास तथा संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। विधानसभा में  वह मुख्य सचेतक सहित कई अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं।
इधर नीतीश कुमार के बेटे निशांत की 3 मई से जिला यात्रा चंपारण से शुरु होगी।मंगलवार को पार्टी कार्यालय में जिलाध्यक्षों की बैठक के बाद निशांत ने ही जिला की यात्रा करने की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि संजय चाचा(पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा) सहित कार्यकत्ता भी यात्रा में साथ देंगे।
मालूम कि नीतीश कुमार के सीएम से पदत्याग के बाद हुई विधायक दल की बैठक में 2030 के विधानसभा चुनाव में 200 सीटों पर जीत की तैयारी के साथ पार्टीजनों को सक्रिय होने की सलाह दी गई है।
पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आगे सब ठीक और अच्छा होने के दावे एव॔ भरोसे के साथ जिलों की यात्रा पर निकलने और विकासयोजनाओं की प्रगति एवं उपलब्धि दैखने की भी बात की है।
माना जा रहा है कि बाप-बेटे(नीतीश-निशांत)ने जिला यात्रा पर निकल पार्टी के सत्ता से बाहर होने से फैला सन्नाटा दूर करने के साथ जदयू का अस्तित्व बचाने की रणनीति अपनाने का संदेश दिया है।

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