मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की  पहले 2011 की जनगणना पर पंचायत निकायों का परिसीमन तब अगले वर्ष चुनाव की पहल
पटना.18 जुलांई।बिहार में दो दशक में दूसरी बार टला पंचायत चुनाव.अब पहले 2011 की जनगणना पर परिसीमन .तब अगले वर्ष चुनाव
पटना.18 जुलाई। बिहार में दो दशक में दूसरी बार पंचायत टल रहा है। पुराने परिसीमन 1991 की जनगणना और 1993-94 के परिसीमन पर ही पहली बार ईवींएम मशीन से आरक्षणक्रम में बदलाव के साथ इसी वर्ष नवम्बर-दिसम्बर तक नियत समय चुनाव कराने की प्रशासनिक तैयारी थम गयी है। 
 वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों की ओर हाईकोर्ट में दायर बिहार राज्य मुखिया संघ के अध्यक्ष मिधिलेश राय और बिहार स्टेट पंच-सरपंच के अध्यक्ष अमोल निराला व अन्य की याचिका के मद्देनजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्य लिया कि 26 वर्ष पहले के परिसीमन की वजाय नया परिसीमन हो। कैबिनेट की पिछली बैठक में 2011 की जनगणना के आधार पर ही त्रिस्तरीय पंचायत निकायों का परिसीमन के बाद चुनाव का निर्णय हुआ है। प्रत्येक 10 वर्षों पर 2021 मैं जनगणना कोरोना की परिस्थितिवश टलती रही।अब 2026 में जनगणना की प्रक्रिया चालू है। यह 2027 में पूरी होगी।
अब पहले 2011 की जनगणना 8.28 करोड़ पर परिसीमन .तब अगले वर्ष जुलाई-अगस्त में पंचायत चुनाव होगा। नया परिसीमन से पंचायत निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या 55% बढ़ जायेगी। मुखिया-सरपंचों की संख्या 8041 से बढढ़कर 12,500 हो जायगी। पंचायतों के वार्ड सदस्यों की संख्या ,109,310 534 पंचायत समिति के 11,070 और 38 जिला परिषदों के 1160 सदस्य हैं।
नये परिसीमन में 500 की आबादी पर ग्राम पंचायतों का वार्ड.7000 की आबादी पर ग्राम पंचायत.5000 की आबादी पर पंचायत समिति का वार्ड और 50 हजार की आबादी पर जिला परिषद सदस्य का वार्ड बनेगा।
उधर सीएम सम्राट चौधरी सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्धिक रूप से सबल बनाने के ध्येय उद्देश्य से 2006 के बिहार पंचायतीराज अधिनियम के तहत पहली बार नियमावली को हरी झंडी देकर कर/शुल्क वसूलने की कानूनी शक्ति भी दे दी है। इसके तहत शहरों की तरह गांवों में भी होल्डिंग टैक्स सहित कंई नये शुल्क की वसूली होगी। सम्राट चौधरी पहले पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं।

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