पंचायत  प्रतिनिधियों ने कहा- पहले  परिसीमन व ओबीसी आरक्षण,तब हो चुनाव

* पटना में त्रिस्तरीय एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधि महासंघ की संयुक्त महाबैठक में बड़े आंदोलन की घोषणा 

 अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे, जुलाई में पटना में होगी बड़ी रैली, बिहार बंद तक कराएँगे 
पटना | बिहार पंचायत चुनाव से जुड़े आरक्षण-परिसीमन सहित अन्य अहम मुद्दों को लेकर बुधवार को राजधानी पटना में त्रिस्तरीय एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधि महासंघ की संयुक्त महाबैठक सम्पन्न हुई। इसकी अध्यक्षता बिहार मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने की, जबकि संचालन पंच-सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला कर रहे थे।
दारोगा प्रसाद राय ट्रस्ट भवन में आयोजित इस महाबैठक में राज्यभर से त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में और जोरदार ढंग से सरकार को चेताते हुए कहा कि परिसीमन के बिना पंचायत चुनाव कराना असंवैधानिक है।
उन्होंने कहा कि हर हाल में परिसीमन कराना होगा और इसके लिए बिहार सरकार को पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बात करनी होगी। 

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय ने मंच से स्पष्ट कहा कि बिहार में परिसीमन और आरक्षण व्यवस्था के बिना चुनाव कराना असंवैधानिक है। उन्होंने इसे लेकर सरकार की नीति पर गंभीर सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि जब तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पंचायत चुनाव कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी एक समय यहां के पंचायती राज मंत्री थे और आज वे बिहार के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उन्हें पंचायत प्रतिनिधियों के पक्ष में अपना निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण देकर इतिहास रचा, उसी तरह आप भी परिसीमन कराकर और ओबीसी आरक्षण लागू कर नया इतिहास रचने का काम करें। 

उन्होंने आगे कहा कि इसे लेकर जून में आंदोलन का पखवारा मनाया जाएगा। इसके तहत चरणबद्ध आंदोलन होगा। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे और बिहार बंद भी कराएँगे। उन्होंने कहा कि जुलाई माह में पटना के बापू सभागार में बड़ा कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में बिहार इकलौता राज्य है, जहां पिछले 36 वर्षों से पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया नहीं हुई है, जबकि कई अन्य राज्यों में समय-समय पर इसे अद्यतन किया गया है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग का भी दायित्व बनता है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पंचायत चुनाव हो। पंचायत को प्रदत्त शक्तियों के अनुरूप चुनाव हो। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि यह लड़ाई अब अपने चरम पर पहुंच गयी है। गांव-गांव में अब आरक्षण और परिसीमन की चर्चा होने लगी है। खास बात कि आज की हमारी महाबैठक पर सरकार की नजर है। 

इसके पहले कृष्णा कुमारी यादव, गणेश चौधरी, जमादार प्रसाद, रश्मि कुमारी, जयमाला पासवान, बिंदु गुलाब यादव, बबलू यादव, महेश राय, विनय भूषण उर्फ शेर सिंह, अभिषेक रंजन, मधुकर कुमार, कांति देवी, अनिल सिंह, कौशल कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने संबोधन में नयी जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने और आरक्षण लागू करने की मांग की। पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर चुनाव कराना असंवैधानिक होगा। बैठक में कई प्रस्तावों के साथ ही पंचायती राज आयोग गठन करने की भी मांग उठी। वहीं पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आमोद कुमार निराला ने बताया कि ग्राम सभा प्रखंड पंचायत समिति एवं जिला परिषद से पारित होंगे परिसीमन एवं ओबीसी आयोग के गठन का प्रस्ताव। तमाम वक्ताओं ने भी कहा कि यदि सरकार ने परिसीमन को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर ले जाया जाएगा। इसके अलावा बैठक में पंचायत राज संस्थाओं की मजबूती, प्रतिनिधियों के अधिकारों की सुरक्षा और सरकार तक उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जिला परिषद संघ, मुखिया संघ के जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारी, प्रमुख संघ के प्रतिनिधि, पंच-सरपंच संघ तथा वार्ड सदस्य संघ से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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