सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक



20% एनपीए, स्वास्थ्य संघ ने किया स्वागत 

पटना, 11 अप्रैल. CM नीतीश कुमार ने अपनी विदाई के पहले आज ऐतिहसिक आदेश दिया है। बिहार के सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगा दी गई है.इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने पत्र भी जारी कर दिया है.


बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के महासचिव डा.अभिताभ ने निजी प्रैक्टिस पर रोक को जनहित में बडा फैसला मानते हुए इसके उल्लंघन को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में शामिल कर निगरानी या ईंओई को रिश्वतखोरी का मुकदमा दायर कर कार्रवाई करने का कानूनी प्रावधान होना चाहिए .


डा.अमिताभ के अनुसार सरकारी  चिकित्सको के 16 हजार से अधिक चदों में पांच हजार खाली हैं। इन पदों को शीघ्र भरने के साथ  लंबित प्रोन्नति देने में विलंब नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा मुश्किल से 20% चिकित्सकों पर रोक का असर होगा. रोक सही तरीके से प्रभावी होने पर चिकित्सा सेवा में व्यापक सुधार होगा.


अब बिहार के सरकारी चिकित्सक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं.
सात निश्चय तीन के तहत एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत कार्यरत बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग, बिहार चिकित्सा सेवा संवर्ग तथा इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों, चिकित्सा शिक्षकों के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगा दी गई है. आईजीआईएमएस में प्रैक्टिस पर पहले से रोक लगी है. इसके लिए 20% अतिरिक्त देय है.
स्वास्थ्य विभाग के आदेश के फलस्वरूप चिकित्सकों को गैर व्यावसायिक भत्ता (एनपीए) प्रोत्साहन राशि दिए जाने के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश अनुमोदन के बाद निर्गत किया जाएगा. इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह की तरफ से संकल्प जारी किया गया है.

Top