बिहार में सत्ता परिवर्तन का टाइम लांईन
अरुण कुमार पाण्डेय 
बिहार में सत्ता परिवर्तन का आखिर टाइम लांईन तय हो गया हे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहली बार राज्यसभा जाने  
निर्णय और 10 अप्रैल को राज्यसभा की अकेले मदस्यता ग्रहण के साथ ही सीएम से पदत्याग के दिन निकट आ गये। चारों सदनों के सदस्य बनने का सपना पूरा होने के साथ नीतीश कुमार की सीएम पद से विदाई के दिन और शमय का वेशव्री शे इंतजार का क्षण शमाप्त होने को है। 20 फरमरी के बाद कैविनेट की अंतिम बैठक 14 अप्रैल को मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट रूम में पूर्नाहन 11 बजे होगी। उसके पहले या बाद में नीतीश अपने कक्ष में अंतिम बार सीएम की कुर्सी पर बैठे दिखेंगे। नीतीश कुमार की यह 10वीं कैबिनेट और पांचवां टर्म है।
सीएम नीतीश कुमार 14 अप्रैल को ही लोकभवन जाकर राज्यपाल को त्यागपत्र देंगे। इसे स्वीकार करने के साथ नंई सरकार बनने तक काम करने कहा जायेगा।
विहार में नई सरकार के लिए 15 अप्रैल को पूर्वाह्न एनडीए विधानमंडल दल की बैठक कर नेता चयन की औपचारिकता पूरी होगी।उसके पहले भाजपा विधानमंडल दल की बैठक होपगी।केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी के पर्यवेक्षक के नाते बैठक में रहेंगॅ।
बिहार में पहली बार भाजपा नीत सरकार के पहले सीएम के साथ कैबिनेट के सदस्यों का लोकभवन में अपराह्न 4 वजे शपथग्रहण होगा।बिहार मे सीएम सहित 36 मंत्री बनाये जा सकते हैं। फार्मूला के तहत पांच दलों के 202 विधायकों मे भाजपा के 15-16 ,जदयू के 14-15,लोजपा के 3 और हम व रालोमो के 1-1 मंत्री होंगे।अभी तो भाजपा के दो डिप्टी सीएम सहित 14 मंत्री हैं। जदयू के सीएम सहित 14 और लोजपा के 2 मंत्री हैं।
नई सरकार में भाजपा का सीएम होने से दो डिप्टी सीएम जदयू के होंगे।जदयू की उम्मीद और भविष्य के चेहरा ,नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत संभालने के किरदार और पार्टी को टूट-फूट से बचाने व भविष्य संवारने का दारोमदार निशांत को मानकर ही राजनीति में सक्रिय किया जा रहा है.पार्टी और संगठन मैं पहले भूमिका व दायित्व मिले फिर निशांत परफार्म करें,यही कठिन चुनौती होगी.नीतीश कुमार के सत्ता से वाहर होने तथा उनकी उम्र और सेहत देख अव उनस सबल नेतृत्व की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद की राजनीति की काट में सामाजिक जनाधार को जो तानाबाना तैयार किया है उसे बचाये रखना भी भविष्य की चुनौती है।




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