जनसुराज पार्टी की पूरे दमखम के साथ  स्थानीय निकायों के चुनाव  में कूदने की तैयारी
पटना,22 मार्च। जनसुराज पार्टी ने पूरे दमखम के साथ चुनावी जंग में कूदने की तैयारी तेज कर दी है।
विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पिटने के बाद जनसुराज पार्टी पुनर्जीवित करने के अभियान में जुट गयी है।
प्रशांत किशोर ने रविवार को नवादा में बताया कि उनका मुख्य फोकस अब पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों पर है। उन्होंने कहा कि हर पंचायत में उम्मीदवार उतारकर जनता के बीच एक नया विकल्प पेश किया जाएगा। नवादा जैसे जिला में उनकी नियमित उपस्थिति से जन सुराज को ताकत मिलेगी। जन सुराज का दावा है कि यह अभियान बिहार में एक नई राजनीतिक संस्कृति लाएगा, जहाँ परिवारवाद के बजाय योग्यता, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशांत किशोर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले 30 सालों में बिहार की राजनीति में केवल लगभग 1200 परिवारों के लोग ही सांसद, विधायक या मंत्री बने हैं। वहीं, आम गरीब युवा दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने इस बयान को बिहार की राजनीति में वंशवाद पर बहस छेड़ने वाला बताया। 
उन्होंने जदयू अध्यक्ष एवं सीएम नीतीश कुमार द्वारा बेटे निशांत को राजनीति में सक्रिय कर संगठन और सरकार में बैठाने पर तंज कसा। उन्होंने कहा राजनीति में परिवारवाद से दूरी बनाने का दंभ भरने वाले नीतीश कुमार का असली चेहरा सामने आ गया है।

उधर राज्य निर्वाचन आयोग ने 50 नगर निकायों का आम चुनाव याउप चुनाव कराने की तैयारी हो रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत निकायों का नवम्बर-दिसम्बर के पहले पुराने परिसीमन पर ही चुनाव कराने की प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है। पहली बार पंचायत चुनाव ईवीएम के माध्यम से होगा। प्रत्यक दो चुनाव के बाद नये आरक्षण रोस्टर पर चुनाव का नियम लागू होगा। 
बिहार में वर्तमान में कुल 8,053 ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं। ये पंचायतें राज्य के 38 जिलों में फैली हुई हैं, और इसके साथ ही यहाँ 533 पंचायत समितियां भी कार्यरत हैं। पंचायतों का कई चरणों में समय पर चुनाव के लिए दो-तीन महीना पहले ही प्रक्रिया शुरु होगी। चुनाव दलीय आधार पर नहीं होने के बाबजूद जनसुराज पार्टी ने खुलकर अपनी मजबूत उपस्थिति दिखाने की तैया में है। प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में दलीय सियासत होती है।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्धारित प्रावधानों के तहत सभी आरक्षित कोटि के पदों के चक्र (Rotation) में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले दो चुनावों में जिन सीटों पर जिस कोटि के उम्मीदवारों को आरक्षण मिला था, अब वहां आरक्षण का गणित पूरी तरह बदल जाएगा।पंचायती राज अधिनियम के तहत यह नियम है कि लगातार दो आम चुनावों के बाद आरक्षण का चक्र बदलना अनिवार्य है। गौरतलब है कि नीतीश सरकार ने वर्ष 2006 में पहली बार आरक्षण लागू किया था, जिसका चक्र 2011 में पूरा हुआ। इसके बाद वर्ष 2016 और 2021 के पंचायत चुनावों में एक ही रोस्टर प्रणाली लागू रही। चूंकि अब दो चुनाव पूरे हो चुके हैं, इसलिए वर्ष 2026 में होने वाले चुनाव में पुरानी आरक्षित सीटों को मुक्त कर जनगणना के आधार पर नए सिरे से आरक्षण तय किया जाएगा।


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