PK बोले-पैसे और चुनाव आयोग की मदद से मिली बनावटी परिणाम के कारण नीतीश कुमार को इस्तीफा देने की आई नौबत


  1. जुलाई में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा जन सुराज का सदस्यता अभियान

संजय कुमार की रिपोर्ट
बांका,28 मार्च। । जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर शनिवार कौ यहां कहा- पैसे और चुनाव आयोग की मदद से मिली बनावटी परिणाम के कारण नीतीश कुमार को इस्तीफा देने की आई नौबत आई है।
वे "बिहार नवनिर्माण अभियान" पर बाँका पहुंचे। इस दौरान वे हर जिले में संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर पूरे बिहार में जनसुराज के संगठन को पंचायत स्तर पर मजबूत बनाने पर बल दिया।
 
बाँका में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि अप्रैल, मई, जून इन आने वाले 3 महीनों में जन सुराज राज्य भर में संगठन को फिर से पुनर्गठन करेगा। वहीं जुलाई से राज्य भर में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव परिणाम के बाद जन सुराज के नेताओं ने पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का उपवास रखा था। उस समय जन सुराज की ओर से यह घोषणा की गई थी कि बिहार में बनी नई सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए 6 महीने का समय दिया जाएगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि इसके बाद ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत जन सुराज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता के बीच अपनी बात रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान को अगले पांच वर्षों तक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए वे हर जिले में जाकर संगठन को पुनर्गठित कर रहे हैं।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे हैं। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह है कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद नीतीश कुमार को 3 महीने में ही मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह जीत नीतीश कुमार या एनडीए की लोकप्रियता की जीत नहीं है, बल्कि पैसे और चुनाव आयोग की मदद का परिणाम है। इस मैन्युफैक्चर्ड परिणाम के कारण ही उन्हें सीएम पद छोड़ना पड़ रहा है।
बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार का मुख्यमंत्री कोई भी बने, नीतीश कुमार के बाद बिहार चलाने वाले लोग के लिए बिहार से ज्यादा गुजरात की चिंता होगी। उन्होंने आगे कहा कि नए मुख्यमंत्री की चिंता यह होगी कि गुजरात की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की कमी न हो।

Top