बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के चुनाव में होगा खेला  3-6 के गणित में पांचवीं सीट की दावेदारी होगी तय
अरुण कुमार पाण्डेय 
पटना,14 मार्च। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को  होने वाले चुनाव में खेला होगा । 3-6 के गणित में पांचवीं सीट की दावेदारी तय होगी।
10 राज्यों में से 7 राज्य की 26 राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध  चुनाव हो गया। है, लेकिन 3 राज्यों की 11 सीटों के लिए अब सियासी घमासान होगा?
इनमें से हरियाणा, ओडिशा और बिहार में निर्धारित सीटों से ज्यादा उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
बिहार की पांचवी सीट पर होगा मुकाबला
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए 6 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. बीजेपी की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व विधायक शिवेश कुमार मैदान में है तो जेडीयू से केन्द्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और सीएम व जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार किस्मत आजमा रहे हैं.।  एनडीए की तरफ से पांचवें उम्मीदवार कहें रालोमो अध्यक्ष व वर्तमान सासंद उपेंद्र कुशवाहा हैं. आरजेडी ने  भी वर्तमान सासंद  अमरेन्द्रधारी सिंह को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को रोचक बना दिया है. 

बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों की जरूरत है. एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं जबकि विपक्ष के पास 35 विधायक हैं. इसके अलावा छह विधायक अन्य हैं. बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को अपनी जीत के लिए आरजेडी से दो-दो हाथ करना होगा. कुशवाहा को तीन अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए तो आरजेडी के अमरेंद्र सिंह को 6 विधायकों का समर्थन चाहिए. आरजेडी की ओवैसी की पार्टी का समर्थन के लिए  सकारात्मक बातचीत हुई है. बसपा के भी एक विधायक का  समर्थन पाने की उम्मीद में है।अब देखना है कि कौन सियासी बाजी मारता है?
पांचवी सीट पर सियासी संग्राम होगा
फिलहाल चर्चा है कि भाजपा के शिवेश कुमार एनडीए के पांचवे उम्मीदवार हों सकते है।संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी के आवास पर शनिवार को आयोजित बैठक में अंतिम रूप से तय होगा कौन विधायक किस प्रत्याशी को वोट देंगे।उम्मीद है लोजपा और हम के विधायकों को भाजपा उम्मीदवार को वोट देने की सूची तय हो सकती है।
लाख टके का सवाल बना है कि क्या इस चुनाव में विधायकों के लिए सेधमारी होगी? शत प्रतिशत
 वोटिंग होगी? वोटिंग के बाद रणनीति के तहत वोटिंग रद्द करने करवाने की रणनीति होगी? आखिर वैध वोटों के आधार पर ही हार जीत तय होगी। नियमतः प्रत्याशी के अधिकृत एजेंट को दिखाकर ही वोटिंग देना है। वोटिंग के लिए पार्टी का व्हीप मान्य नहीं होता। ऐसे में या तो अनुपस्थित होकर या खुला दिखा भी अपेक्षित कैडिंडेट की बजाय किसी अन्य को वोट देने या वोटिंग रद्द करवाने की रणनीति का खेल हो सकता है।आखिर एनडीए सभी पांच सीटे जीतने और ज्यादा ही वोट पाने के दावे में कितना दम है?
महागठबंधन भी एआईएमआईएम के राजनीतिक करवट बदलने के संकेत से अपने उम्मीदवार की जीत होने का दावा कर रहा है।
दावे-प्रतिदावे का सच तो अब 16 मार्च की देरशाम रिजल्ट आने से साबित होगा।
हरियाणा में पहले देखा गया है कि कांग्रेस के पास संख्याबल होने के बावजूद उसके प्रत्याशी आर के आनंद को हार का सामना करना पड़ा था. भाजपा समर्थित  निर्दलीय सुभाष चंद्रा को जीत मिली थी।कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट रद्द हो गये थे। खुलकर वोट दिया था। 100% वोट हुआ था।90 में सभी 90 ने वोट दिया था।कांग्रेस के 13 विधायकों के वोट रद्द हो गये थे।

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