विधान परिषद में होगी कर्मचारियों की छंटनी ?

पटना,21 फरवरी। बिहार विधानमंडल सचिवालय में हाल तक बम्पर नियुक्तियों का सिलसिला  के बीच अब छंटनी का विचार हो रहा है। 75 सदस्यीय उच्च सदन कही जाने वाली परिषद के 800 से अधिक कर्मियों में से अधिसंख्य की नौकरी जा सकती है।
जानकारी के अनुसार दोनों सदनों के सचिवालय में पिछले वर्षों में बम्पर नियुक्तियों को एक बडी उपलब्धि का श्रेय बटोरने की होड रही वहीं अधिसंख्य कर्मियों की दक्षता सवालों के घेरे में रही है। हा जा रहा कि कर्मियों की संख्या अत्यधिक होने के बाबजूद सचिवालय की कार्यकुशलता में सुधार की बजाय कमी दिख रही है। इसी कारण शिक्षकों तरह विधान परिषदकर्मियों के लिए सक्षमता परीक्षा लेकर  छंटनी की जा सकती है। इसके लिए कानूनी पहलुओं पर भी विचार हो रहा है। 20 वर्ष की सेवा कर चुके कर्मियों की भी सेवा-योग्यता व दक्षता की गहन समीक्षा कर विदाई देने की कार्रवाई विचाराधीन है।
चालू बजट सत्र के बाद परिषद सचिवालय के कामकाज में सुधार के लिए सख्त कदम उठाये जाने के आसार हैं। फिलहाल कर्मचारियों के अत्यधिक संख्याबल की हालत में सैकडों की संख्या में कर्मियों को टेबुल पर काम करते दिखने की बजाय जहां तहां वैठे-घूमते देखा जा रहा है।
पिछले दशकों में विधानसभा और परिषद सचिवालय में कर्मचारियों की नियुक्ति पर सीएजी की कडी आपत्तियां देखने को मिली थी। वर्षो बाद लोक लेखा समिति ने उसका निष्पादन किया था। 
हाल के वर्षों हुई बम्पर नियुक्ति  में राज्य सरकार के अधीनस्थ नियुक्ति एजेंसियों के बजाय  निजी एजेंसियों की सहायता को लेकर भी की तरह-तरह की चर्चा गर्म रही है। 
फिलहाल परिषद सचिवालय में छंटनी की तैयारी का विचार सामने आने से हड़कंप मचना स्वभाविक है। 
इस संबंध में जानकारी लिये जाने पर परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भविष्य का इंतजार करने की बात कही और साथ में बड़े जोर देकर कहा कि अनुशासन और सुधार को प्राथमिकता तो मिलनी ही चाहिए।

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