संस्कृत और हिन्दी के मनीषी विद्वान और चिंतक-कवि थे आचार्य कैलाश प्रसाद सिंह

अनेक संस्थाओं की ओर से साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई श्रद्धांजलि-सभा

पटना, ४ फरवरी। शिक्षा सेवा के अधिकारी रहे संस्कृत और हिन्दी के मनीषी विद्वान आचार्य कैलाश प्रसाद सिंह एक चिंतक-कवि और साहित्यकार थे। उनके विपुल साहित्य में स्थल-स्थल पर भारतीय प्राच्य-साहित्य का प्रभाव दिखता है। पद्य और गद्य में समान अधिकार रखने वाले आचार्य कैलाश का व्यंग्य-साहित्य में भी गहरा अधिकार था। उनके एक पैरोडी गीत सारे जहां से अच्छे हम दुम हिलाने वाले को बहुत प्रसिद्धि मिली थी। 
यह बातें बुधवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, भारत विकास परिषद और प्रबुद्ध हिंदू समाज के तत्त्वावधान में आयोजित श्र्द्धांजलि-सभा की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि आचार्य कैलाश जी का अनुशासित और सादा-जीवन भारत के उस महान विचार का प्रतिवादन करता है, जिसमें सादा जीवन और उच्च विचार की महिमा गायी गयी है। इसीलिए उन्होंने ९३ वर्ष की लम्बी और निराश्रित आयु प्राप्त की, जो प्रेरणादायक है।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो संजय पासवान ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डा कैलाश प्रसाद सिंह एक महान साहित्यकार और वेद-पुराणों के ज्ञाता तो थे ही, समाज को बदलने की आकांक्षा रखने वाले विद्वान आचार्य भी थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से समाज को शिक्षा और प्रेरणा देते हैं। वे उच्च स्तर के कवि और समाजधर्मी मनीषी थे। 
सुप्रसिद्ध समाजसेवी पद्मश्री विमल जैन ने कहा कि कैलाश बाबू एक महान आत्मा थे। उनके निधन से समाज को बड़ी क्षति पहुँची है। ऐसे लोगों से समाज प्रेरणा लेता है। आरा से पधारे साहित्यकार प्रो बलिराज ठाकुर, डा वाल्मीकि कुमार, ईं अरुण कुमार राय, कुमार अनुपम, ईं अशोक कुमार, पद्म कुमर शर्मा, चंदा मिश्र और आचार्य कैलाश के कवि-पुत्र डा मनोज कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए और आचार्य कैलाश को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। मंच का संचालन डा मनोज गोवर्द्धनपुरी ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया। 
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार ईं बाँके बिहारी साव, कवि इन्दु भूषण सहाय, प्रवीर कुमार पंकज, अश्विनी कविराज, कुमारी कल्पना रानी, सच्चिदानंद शर्मा, जय शंकर प्रसाद, अधिवक्ता अमरेन्द्र कुमार, विनीता कुमारी, प्रीति भारती, अमित कुमार मिश्र, मधुरेंद्र कुमार मधुप, सुबोध कुमार सुमन, आलोक कुमार, नृपेंद्र कुमार, ईं शशिकांत शेखर, डा चंद्रशेखर आज़ाद आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

Top