आदर्श-जीवन और प्रेरणा के जीवंत प्रतीक हैं श्याम बिहारी प्रभाकर : पूर्व राज्यपाल

९३वें जन्मोत्सव पर साहित्य सम्मेलन में हुआ सम्मान, भेंट किया गया "अभिनन्दन-ग्रंथ", आयोजित हुई कवि-गोष्ठी

पटना, ०३ जनवरी। ९३ शरद देख चुके बिहार के वयोवृद्ध कवि-कलाकार श्याम बिहारी प्रभाकर आदर्श-जीवन के जीवित प्रमाण है। कोई भी व्यक्ति अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीते हुए लम्बी आयु प्राप्त कर सकता है, यह प्रभाकर जी के जीवन से सीखा जा सकता है। उनका गुणवत्तापूर्ण मूल्यवान जीवन सबके लिए प्रेरणादायक है। 
यह बातें शनिवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन सभागार में श्री प्रभाकर के ९३ वे जन्मोत्सव पर आयोजित सम्मान-समारोह का उद्घाटन करते हुए सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कही। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की सेवा से वर्षों पूर्व अवकाश ले चुके प्रभाकर जी रंगमंच, आकाशवाणी और दूरदर्शन के लोकप्रिय कलाकार ही नहीं, एक मर्म-स्पर्शी काव्य-सृजन करने वाले संवेदनशील कवि भी हैं। इनका जीवन अनुकरणीय है।
पूर्व राज्यपाल ने इस अवसर पर साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रकाशित अभिनन्दन ग्रंथ "सबके अपने प्रभाकर" का लोकार्पण किया और उसे सम्मेलन की ओर से श्री प्रभाकर को "जन्मोत्सव-भेंट" प्रदान किया।
कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय द्वारा संपादित इस ग्रंथ में ७४ विद्वानों और साहित्यकारों ने श्री प्रभाकर के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए हैं।
इसके पूर्व सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने ९३ वें जन्म-दिवस पर श्री प्रभाकर को सुंदर अंग-वस्त्रम और पुष्प-हार से सम्मान किया। अपने उद्गार में डा अनिल सुलभ ने कहा कि प्रभाकर जी दोष-रहित सार्थक जीवन के सुंदर उदाहरण हैं। स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की प्राप्ति किस प्रकार की जा सकती है, यह प्रभाकर जी के जीवनादर्श से सीखा जा सकता है। इनके जीवन का प्रत्येक पक्ष अनुशासित, सकारात्मक और कल्याणकारी है। सभी प्रकार के व्यसनों से दूर प्रभाकर जी सादगी,सदाचार और शुचिता के मूर्तमान रूप हैं। ९३ वर्ष की आयु में भी इनकी कर्मठता चकित करती है। एक कवि और रंगकर्मी के रूप में इन्हें आदरणीय स्थान प्राप्त है। 
सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, आयुर्वेद महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा दिनेश्वर प्रसाद, डा जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता,भगवती प्रसाद द्विवेदी, डा पुष्पा जमुआर, डा अशोक प्रियदर्शी, डा शशि भूषण सिंह, डा रत्नेश्वर सिंह, कुमार अनुपम, बाँके बिहारी साव, विभारानी श्रीवास्तव, कमल वास राय, सत्यजीत राज, डा अविनाश प्रसाद, विनोद कुमार गुप्ता, ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा श्री प्रभाकर के शतायु होने की मंगल कामना की।
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ कवयित्री आराधना प्रसाद की वाणी-वंदना से हुआ। वरिष्ठ कवि मधुरेश नारायण, डा पूनम आनन्द, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, शमा कौसर शमा, सुनील कुमार, जय प्रकाश पुजारी, डा शालिनी पाण्डेय, डा मीना कुमारी परिहार, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, शुभ चंद्र सिन्हा, ई अशोक कुमार, उमेश मिश्र, डा ओम् प्रकाश जमुआर, डा आर प्रवेश, मृत्युंजय गोविन्द, प्रभात धवन, नीता सहाय, डा अर्चना त्रिपाठी, अभय आर्या, सुनीता गुप्ता, संजय लाल चौधरी, ओम् नमः शिवाय सिंह, डा प्रियंका सिन्हा, नन्दन कुमार आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी मधुर काव्य-रचनाओं से उत्सव में रस और उल्लास का सृजन किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
श्री प्रभाकर के जमाता चक्रधर प्रसाद, मंजू गुप्ता, मीना गुप्ता, श्रीकांत व्यास, विश्व मोहन चौधरी संत, नमन प्रिया, राज कुमार चौबे, राम किशोर सिंह विरागी, अशोक कुमार गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद आदि प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।

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