नहीं रहे वयोवृद्ध शिक्षाविद् और साहित्यकार डा कैलाश प्रसाद सिंह


93 वर्ष की आयु में हुआ निधन, साहित्य सम्मेलन ने गहरा शोक-व्यक्त किया 

पटना, ०2 जनवरी। संस्कृत, हिन्दी और मैथिली भाषाओं के सुप्रसिद्ध विद्वान और कवि डा कैलाश प्रसाद सिंह नहीं रहे। 93 वर्ष की आयु में गुरुवार और शुक्रवार की मध्य-रात्रि में दो बजे उन्होंने पटेल पथ, शेखपुरा स्थित अपने निवास पर अपना लौकिक देह त्याग दिया। अपने एक पैरोडी व्यंग्य गीत “सारे जहां से अच्छे हम दुम हिलाने वाले” से चर्चा में आए डा सिंह अनेक पुस्तकों के रचयिता और गंभीर लेखक माने जाते रहे हैं। उन्होंने बिहार शिक्षा सेवा के अन्तर्गत शैक्षणिक, प्रशैक्षणिक तथा प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए 31 जनवरी 1991 को जिला शिक्षा पदाधिकारी के पद से सेवा निवृत्ति ली थी। वे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक-सदस्य और प्रबुद्ध हिन्दू समाज के अध्यक्ष रह चुके थे।

उनके निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक व्याप्त है। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने सूचना मिलते ही उनके आवास पर पहुँच कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा परिजनों को सांत्वना दी। शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कैलाश बाबू यश की कामना से दूर रहने वाले एक एकांतिक तपस्वी थे। अवकाश प्राप्ति के उपरांत वे विविध सामाजिक, साहित्यिक,आध्यात्मिक तथा शैक्षणिक स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े थे, जिनमें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भारत विकास परिषद, प्रबुद्ध हिन्दू समाज, विश्व हिन्दी संवर्धन समित आदि प्रमुख हैं। उन्होंने संस्कृत, हिंदी, मैथिली, मगही आदि भाषाओं में कई पुस्तकों की रचना की, जिनमें “अनुभवामि दिने दिने”, “उत्तमः सर्वधर्माणाम”, “मैथिली भाषा शिक्षण पद्धति” आदि विशेष उल्लेखनीय है।

शुक्रवार को तीसरे पहर गुलबी घाट पर उनका अग्नि-संस्कार संपन्न हुआ। उनके कनिष्ठ पुत्र और पत्रकार अमरेश सौरभ ने मुखाग्नि दी ! उनके कवि पुत्र डा मनोज कुमार समेत बड़ी संख्या में शोकाकुल परिजन उपस्थित थे। 
    शोक व्यक्त करने वालों में प्रो जनार्दन सिंह, डा दीपक शर्मा, रंजन कुमार मिश्र, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, विभारानी श्रीवास्तव, आचार्य पाँचू राम, डा शालिनी पाण्डेय, कुमार अनुपम, डा सुधा पाण्डेय आदि प्रमुख हैं।

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