बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में
"कृत्रिम-बौद्धिकता" कहीं मनुष्य का हृदय न छीन ले,रहें सावधान !
पटना, १५ मार्च। अत्यंत तीव्र गति से बदल रहे संसार में "कृत्रिम-बौद्धिकता" एक बहुत बड़ा युगांतर उत्पन्न करने जा रही है। यद्यपि कि यह मानव-बुद्धि की ही उपज है, किंतु यदि इसे मर्यादित नहीं रखा गया तो यह कुछ ही दिनों में संसार की बुद्धि ही नहीं मानव का हृदय भी छीन लेगी। तकनीक के इस युग में इससे न तो बचा जा सकता है और न इसे टाला ही जा सकता है। यह मानव-जीवन का अपरिहार्य और अनिवार्य हिस्सा बनने जा रही है। यदि इसका सदुपयोग किया जा सका तो संसार बहुत शीघ्रता से समृद्ध हो जाएगा, और यदि दुरुपयोग हुआ तो विनाश भी शीघ्र हो सकता है। साहित्यकारों के लिए यह विषय अत्यंत चुनौती भरा है। क्योंकि अंततः समाज के मार्ग-दर्शन का दायित्व साहित्य समाज पर ही है।

यह बातें रविवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में साहित्यिक संस्था "लेख्य-मंजूषा", पटना तथा "अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय" बंगलुरु के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित हुए साहित्योत्सव का उद्घाटन करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि समान विचार-धारा वाली देश की संस्थाएँ संयुक्त होकर साहित्य और समाज को संतृप्त कर रही हैं, यह एक स्तुत्य और स्वागत योग्य कार्य है। साहित्यिक संस्थाएँ भी "कृत्रिम-बौद्धिकता" जैसे तकनीकी विषयों को अपने चिंतन में ले रहीं हैं, यह भी परितोषप्रद है।

डा सुलभ ने इस अवसर पर लेख्य-मंजूषा की ओर से संस्था की अध्यक्ष विभारानी श्रीवास्तव के सम्पादन में प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका "साहित्यिक स्पंदन" तथा कोलकाता की लेखिका सविता भुवानिया के लघुकथा-संग्रह "खिलते कुसुम" का लोकार्पण भी किया। चंदा मिश्र की वाणी-वंदना और अभ्युदय की संस्थापिका डा इन्दु झुनझुनवाला तथा कवयित्री डा कृष्णा मणिश्री द्वारा प्रस्तुत "अभ्युदय-गान" से आरम्भ हुए इस साहित्योत्सव में उद्घाटन-सत्र के पश्चात "कृत्रिम-बौद्धिकता" का कैसे हो सदुपयोग?" विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें बंगलुरु से पधारे "अभ्युदय" के अध्यक्ष डा प्रेम तन्मय, अनिल वसंत मोघे, डा इन्दु झुनझुनवाला, डा ध्रुब कुमार, ग़ाज़ियाबाद से पधारीं वरिष्ठ विदुषी कमला अग्रवाल तथा रंजना सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उद्घाटन-सत्र का संचालन रवि भूषण ने तथा गोष्ठी का संचालन मैसूर से पधारीं डा कृष्णा मणिश्री ने किया। इस अवसर पर दोनों संस्थाओं की ओर से डा अनिल सुलभ को "डा सतीशराज पुष्करणा स्मृति सम्मान" से विभूषित किया गया।

भोजनावकाश के पश्चात वरिष्ठ कवि और साहित्य सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी की अध्यक्षता में एक भव्य कवि-सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, जिसमें नोएडा से पधारे "मंज़िल समूह साहित्यिक मंच" के मुख्य कार्यकारी सुधीर सिंह सुधाकर, डा शशि भूषण सिंह, मधुरेश नारायण, शुभचंद्र सिन्हा, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, डा किशोर सिन्हा, डा उषा सिन्हा, डा अनीता राकेश, कमल किशोर वर्मा "कमल", डा शालिनी पाण्डेय, मीरा प्रकाश, डा मीना कुमारी परिहार "मान्या", डा अमृता सिन्हा, राँची से आयीं अर्पणा सिंह "अर्पी", आशा रघुदेव, शिशिर झा, एकता कुमारी, नूतन सिन्हा, डा सुमन लता, तनुजा सिन्हा, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, अनुपमा सिंह, प्रियंका श्रीवास्तव "शुभ्र", सुनीता रंजन, ख़ुशबू प्रिया आदि कवयित्रियों और कवियों ने अपनी रचनाओं के मधुर पाठ से कवि-सम्मेलन को चिर-स्मरणीय बना दिया। कवि-सम्मेलन का संचालन अपराजिता रंजना ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन प्रो सुधा सिन्हा ने किया।

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