बिहार में विपक्ष में टूट-फूट के बावजूद विपक्ष के नेता की कुर्सी सलामत?

पटना,22 अप्रैल। बिहार विधान सभा को 24 को विशेष सत्र की बैठक होगी। भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विश्वास मत प्रस्ताव पेश कर सदन में बहुमत की शक्ति प्रदर्शन करेंगे। उधर विपक्ष की एकजुटता खतरे में है।हाल के राज्यसभा चुनाव मैं कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक की पार्टी से अलग राह होने से  टूट-फूट बलवती हो गयी है। सीएम सम्राट चौधरी ने हाल में मीडिया से बातचीत में विपक्ष दलों में अपने कारणों से टूट-फूट पडने से  40 विधायकों के पाला बदलने का संकेत और दावा किया है।
 243 सदस्यीय विधान सभा में सत्तारूढ एनडीए के 202 विधायकों में एक कम हो गया है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सदस्य बनने के बाद विधानसभा की बांकीपुर सीट खाली कर दी है। उपचुनाव से यह सीट भरेगी।
अब यह लाख टके के सवाल बना है कि राजद के  25 विधायकों की संख्या घटी तो क्या तेजस्वी यादव की विके नेता की कुर्सी खतरे में होगी?परिषद में राबडी देवी विपक्ष की नेता हैं।
बिहार में विपक्ष के नेता के वेतन-सुविधाओं के लिए अलग से नियमावली बनी है। विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री के समतुल्य वेतन-सविधायें देय हैं।
पहले के नियम के तहत विपक्ष के नेता की मान्यता के लिए दल विशेष के कम से कम 10% सदस्य होना अनिवार्य था। परंतु 2006 में नीतीश सरकार ने नियमावली में संशोधन कर विपक्ष के नेता के रूप में  मान्यता के लिए संख्या की अनिवार्यता समाप्त कर अध्यक्ष/सभापति की अनुकंपा का पद बना दिया है। 2006 की नियमावली में विपक्ष के नेता को परिभाषित किया गया है  विपक्ष के सबसे अधिक संख्या वाले दल के नेता को अध्यक्ष/सभापति विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देंगे। तभी सरकारी सुविधायें देय होंगी ।
ऐसे में अब कम से कम संख्या बल का कानूनी झंझट नहीं है। हां, पार्टी में टूट के लिए दो-तिहाई सदस्यों के साथ पार्टी से अलग होने पर ही सदस्यता बचने का का प्रवधान है।
मालूम हो कि 17वीं विधानसभा में विपक्ष के छह विधायकों ने पाला बदल लिया था यथा राजद-कांग्रेस में फूट पड़ी थी।दल की ओर से पाला बदलने वाले विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की अर्जी के बाबजूद अंत तक निर्णय नहीं हुआ धा।चुनाव के पहले एक-एक कर इस्तीफा से सीट खाली हुई थी।

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