भूमि सुधार का हाल-बेहाल:परिमार्जन के लिए लगभग 40 लाख आवेदन प्राप्त


लैंड बैंक निर्माण में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी, विकास कार्यों के लिए जमीन चिन्हित कर शीघ्र करें उपलब्ध : डॉ. दिलीप जायसवाल

राजस्व महा अभियान के आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें, फॉर्मर रजिस्ट्री को गति देने में न बरतें लापरवाही




पटना :  मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुंगेर, पूर्णिया एवं कैमूर जिलों के राजस्व कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्धारित समय सीमा में कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करें, अन्यथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
समीक्षा के दौरान  मंत्री ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि विकास कार्यों और औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए प्राथमिकता के आधार पर लैंड बैंक का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की विशेष समीक्षा की जाए तथा सरकारी जमीनों पर की गई अवैध अथवा गलत जमाबंदियों को तत्काल रद्द करने की कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा करते हुए माननीय मंत्री ने कहा कि केवल वादों के निष्पादन की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्णयों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि कमजोर एवं त्रुटिपूर्ण आदेश उच्च न्यायालयों में टिक नहीं पाते हैं। इसलिए सभी स्तरों के न्यायालयों में गुणवत्तापूर्ण निर्णय सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अगली समीक्षा से जिला समाहर्ता एवं प्रमंडलीय आयुक्त स्तर के न्यायालयों की भी नियमित समीक्षा की जाएगी।
राजस्व महा-अभियान के तहत प्राप्त आवेदनों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग और ऑनलाइन प्रविष्टि का कार्य तत्काल पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परिमार्जन के लिए लगभग 40 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं और इनके निष्पादन से फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान को गति मिलेगी। यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इसकी नियमित समीक्षा मुख्य सचिव स्तर से की जा रही है।
दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस एवं ई-मापी के मामलों की समीक्षा के दौरान माननीय मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि डिफेक्ट चेक के नाम पर आवेदनों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति तत्काल बंद की जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ प्रतिदिन प्राप्त होने वाले नए आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन है और इसे हर हाल में पूरा करना होगा।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि विभाग पूरी तरह ऑनलाइन प्रणाली पर कार्य कर रहा है, इसलिए अंचल स्तर पर किसी भी प्रकार का कार्य ऑफलाइन मोड में नहीं होना चाहिए। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी ऑफलाइन कार्य करते हुए पाया गया तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
माननीय मंत्री ने अधिकारियों को यह भी बताया कि मुख्यालय स्तर से प्रतिदिन प्राप्त एवं निष्पादित आवेदनों की समीक्षा की जा रही है और प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के कार्य प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब लापरवाही करने वालों के बचने की कोई संभावना नहीं है।
समीक्षा बैठक में दाखिल-खारिज, दाखिल-खारिज डिफेक्ट चेक, परिमार्जन प्लस, ई-मापी, अभियान बसेरा-2, सरकारी भूमि सत्यापन, राजस्व महा-अभियान, लोक शिकायत, सहयोग शिविर, फॉर्मर रजिस्ट्री तथा राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर लंबित वादों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में विभाग के सचिव श्री जय सिंह एवं विशेष सचिव श्रीमती इनायत खान ने प्रस्तुतीकरण के दौरान जिलों के अधिकारियों से विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान अपर सचिव डॉ महेंद्र पाल, अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री मणि भूषण किशोर, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, आईटी मैनेजर श्री आनंद शंकर समेत अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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