राजस्व मंत्री  विभागीय जांचों पर सख्त, रिपोर्ट नहीं देने वाले अधिकारियों पर होगी अनुशासनिक कार्रवाई

विभागीय कार्यवाहियों की समीक्षा में मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने दिए कड़े निर्देश, जांच प्रतिवेदन में देरी, अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर

बिहार राजस्व सेवा के अंचल अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों एवं समकक्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध कुल 70 विभागीय कार्यवाहियां संचालित, 47 मामलों में अब भी रिपोर्ट लंबित, कुल 147 अधिकारियों के विरुद्ध आरोप पत्र है गठित
पटना ,2० जून : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में लंबित विभागीय जांचों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए माननीय विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांच प्रतिवेदन और अधिगम उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बार-बार स्मरण कराने के बावजूद रिपोर्ट नहीं देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
माननीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित निगरानी शाखा की समीक्षा बैठक में बताया गया कि बिहार राजस्व सेवा के अंचल अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों एवं समकक्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध कुल 70 विभागीय कार्यवाहियां संचालित हैं। इनमें 23 मामलों में जांच प्रतिवेदन प्राप्त हो चुका है, जबकि 47 मामलों में अब भी रिपोर्ट लंबित है। इसके अलावा 17 अधिकारी निलंबित हैं, जिनमें 11 मामले ट्रैप से संबंधित हैं। कुल 147 अधिकारियों के विरुद्ध आरोप पत्र गठित हैं, जिन पर विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई चल रही है।
समीक्षा के दौरान माननीय मंत्री ने लंबित मामलों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि जिन अपर समाहर्ताओं के स्तर से निर्धारित समय-सीमा के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है, उन्हें अंतिम चेतावनी जारी की जाए। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा जाएगा।
ट्रैप एवं भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को विशेष प्राथमिकता देते हुए माननीय मंत्री ने मुख्य जांच आयुक्त एवं जांच आयुक्त से अनुरोध करने का निर्देश दिया कि विभागीय कार्यवाहियों की सुनवाई निर्धारित समय-सीमा में पूरी कर जांच प्रतिवेदन शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में विलंब से गलत संदेश जाता है और ऐसे मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित होना चाहिए।
माननीय मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों के विरुद्ध आरोप पत्र गठित है और तीन बार स्मरण कराने के बावजूद बचाव पक्ष का लिखित अभिकथन प्राप्त नहीं हो रहा है, उन्हें अंतिम अवसर देते हुए समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक सूचना जारी की जाए तथा इसके बाद आवश्यक अग्रेतर कार्रवाई की जाए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विभागीय जांचों की सुनवाई में निगरानी विभाग, विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों की गवाही एवं उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जाएगा।
निगरानी पोर्टल और अन्य माध्यमों से प्राप्त गंभीर शिकायतों पर भी माननीय मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे परिवादों की संबंधित जिलों में समयबद्ध जांच कराकर रिपोर्ट प्राप्त की जाए और उसके आधार पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निलंबित राजस्व अधिकारियों के संबंध में मंत्री ने निर्देश दिया कि जिनका मुख्यालय निर्धारित है, उनसे संबंधित प्रमंडलों में विशेष भू-सर्वेक्षण कार्य लिया जाए ताकि उनकी सेवाओं का उपयोग उत्पादक कार्यों में किया जा सके।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से माननीय मंत्री ने आरोप पत्र प्राप्त होने की तिथि से आगे की कार्रवाई के लिए तिथिवार चेकलिस्ट तैयार करने, संचिकाओं पर स्मरण तिथि अंकित करने तथा सभी पत्राचार का डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्य संधारित करने का भी निर्देश दिया।
निगरानी शाखा के कार्यों की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए माननीय मंत्री ने निर्देश दिया कि शाखा की संचिकाओं को अलग रंग की फ्लाई लीफ में संधारित किया जाए, ताकि वे अन्य संचिकाओं से अलग पहचान में रहें और उन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
बैठक में विभाग के सचिव श्री जय सिंह सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार, अनियमितता और अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों में सरकार की नीति "जीरो टॉलरेंस" की है और किसी भी स्तर पर लापरवाही करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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