बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा का किला ध्वस्त.पीके का शानदार प्रदर्शन, जाति और समीकरण की राजनीति को झटका

पटना.03 अगस्त।बांकीपुर उपचुनाव में पीके का शानदार प्रदर्शन के साथ जाति और समीकरण की राजनीति को झटका कड़ा झटका लगा है।बीजेपी के गढ़ ध्वस्त करते हुए पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार वोट के अंतर से पीछे छोडड़ दिया है। जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर को 63 हजार वोट मिले हैं।सभी 31 चक्र में वोटों की गिनती में पीके ने बढंढ़त कायम रखी। मुख्य विपक्षी दल राजद की प्रत्याशी रेखा गुप्ता सबसे कम 18953 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहीं।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ा उलट-फेर हुआ है। बीजेपी का अभेद किला माना जाने वाली बांकीपुर विधान सभा सीट 8 चुनावोंके बाद उसके हाथ से निकल गयी है। इस सीट को भाजपा अध्यक्ष नीतिन नवीन के राज्यसभा जाने पर इसतीफे सै खाली हुंई थी। पांचवी बार वे बांकीपुर के विधायक बने थे। अब प्रशांत किशोर ने कब्जा जमा लिया है।

इस उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी रेखा गुप्ता की स्थिति काफी कमजोर नजर आई। मतगणना के दौरान आरजेडी उम्मीदवार शुरुआती राउंड से ही तीसरे स्थान पर पिछड़ती चली गईं। पारंपरिक मुस्लिम-यादव वोट बैंक और अन्य असंतुष्ट मतदाताओं का रुझान प्रशांत किशोर के पक्ष में शिफ्ट हुआ, जिससे विपक्षी वोटों का ध्रुवीकरण जन सुराज के पक्ष में हुआ।
प्रशांत किशोर की रणनीति और मुद्दों पर आधारित अभियान रंग लाया।
प्रशांत किशोर की इस जीत के पीछे उनकी जमीन पर की गई सूक्ष्म रणनीति और मुख्य मुद्दों पर केंद्रित प्रचार को माना जा रहा है। जाति और धर्म के पारंपरिक समीकरणों से हटकर उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्थानीय प्रशासनिक सुधारों और बदलाव के मूड को अपना मुख्य हथियार बनाया। इसके साथ ही मोहल्ला बैठकों और आम जनता के साथ सीधे संवाद ने शहरी मतदाताओं के बीच जन सुराज की साख को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

बांकीपुर उपचुनाव के यह परिणाम बिहार की भावी राजनीति के दृष्टिकोण से काफी निर्णायक माने जा रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में खाता न खोल पाने के बाद जन सुराज के लिए यह पहली बड़ी रणनीतिक सफलता साबित हो रही है। भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर की यह जीत न केवल सत्ताधारी दल बल्कि यूपींए के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक तीसरे मजबूत विकल्प के उदय का संकेत भी देती है।



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