राज्य के 9 प्रमंडलों में भूमि-अर्जन प्राधिकरणों को मिले नए पीठासीन पदाधिकारी. रिटायर्ड जिला जज को दायित्व

भूमि-अर्जन मामलों का होगा त्वरित निस्तारण, प्रभावितों को समय पर मिलेगा न्याय : डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल

तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक रहेगा कार्यकाल, सात दिनों में योगदान का निर्देश

पटना.07 अगस्त । भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटारे के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के प्रमंडलीय मुख्यालयों में संचालित भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरणों के लिए नए पीठासीन पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। विभाग के माननीय मंत्री, डा दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि इस संबंध में विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य के नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, दरभंगा, भागलपुर, मुंगेर, पूर्णिया, गया और कोशी (सहरसा) स्थित प्राधिकरणों में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायिक अधिकारियों को पीठासीन पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया है।

नियुक्त अधिकारियों में अली अहमद सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, खगड़िया को मुजफ्फरपुर प्रमंडल, सम्पूर्णानंद तिवारी सेवानिवृत्त अध्यक्ष राज्य परिवहन अपीलीय प्राधिकार, पटना को सारण प्रमंडल, देवराज त्रिपाठी सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश,पू० चंपारण को दरभंगा प्रमंडल, विजय आनंद तिवारी सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश वैशाली को भागलपुर प्रमंडल, विनोद कुमार तिवारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दरभंगा को गया प्रमंडल, राकेश मालवीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोपालगंज को मुंगेर प्रमंडल, राधे श्याम शुक्ला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कैमूर को पूर्णिया प्रमंडल, हसमुद्दीन अंसारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नालंदा को कोशी-सहरसा प्रमंडल और हेमंत कुमार त्रिपाठी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कटिहार को पटना प्रमंडल मे भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकार में पीठासीन पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया है । 

माननीय मंत्री ने बताया कि सभी पीठासीन पदाधिकारियों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक, जो भी पहले हो, रहेगा। सभी अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर संबंधित कार्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन पीठासीन पदाधिकारियों को भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े विवादों की सुनवाई, मुआवजा संबंधी मामलों के निस्तारण तथा अधिनियम के तहत संदर्भित मामलों पर निर्णय देने की शक्तियां प्राप्त होंगी। इस नियुक्ति से भूमि-अर्जन मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और प्रभावित लोगों को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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