बिहार में सामाजिक विज्ञान शोध को मिलेगा वैश्विक सहयोग

पटना, 11 सितम्बर  : मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से आज लोक सेवक आवास स्थित संकल्प में स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित संस्था स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के पूर्व प्रतिनिधि प्रोफेसर मैक्स बर्गमैन और डॉ जीनेथ बर्गमैन और काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) के सदस्य सचिव प्रो धनंजय सिंह तथा विधान पार्षद श्री नीरज कुमार ने शिष्टाचार मुलाकात की।

इस अवसर पर स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च के प्रतिनिधियों ने बिहार में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों में सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने राज्य में शोध संस्कृति को मजबूत बनाने, अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में नए अनुसंधान अवसर विकसित करने के लिए बिहार सरकार के साथ मिलकर कार्य करने में रुचि दिखाई।

स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन वर्तमान में भारत में डिजिटल गवर्नेस, स्पेस साइंस, आपदा प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में ICSSR के साथ मिलकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान की आज के समय में अत्यंत आवश्यकता है। इसके माध्यम से समाज की वास्तविक जरूरतों को समझने, जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने तथा नीति निर्माण को मजबूत आधार प्रदान करने में सहायता मिलती है।

मुख्यमंत्री ने दोनों संस्थाओं के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार के शैक्षणिक उन्नयन, कौशल विकास और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों का सहयोग महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सामाजिक विज्ञान और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर नई शोध पद्धतियों को विकसित किया जा सकेगा, जिससे राज्य के शैक्षणिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन और ICSSR को बिहार में शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आमंत्रित करते हुए विश्वास जताया कि इस सहयोग से विकसित भारत और समृद्ध बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वैश्विक स्तर की संस्थाओं का सहयोग बिहार को प्राप्त होता है तो राज्य में चल रहे शैक्षणिक और अनुसंधान संबंधी प्रयासों के और बेहतर परिणाम सामने आएंगे तथा बिहार पुनः ज्ञान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और सशक्त करेगा।

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