नीतीश कुमार के करीबी रहे  आरसीपी सिंह  जदयू मेंवापसी को बेताव
पटना,27 जून।  जदयू राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई । जदयू के पूर्व अथ्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री और  आरसीपी सिंह शनिवार को  नीतीश कुमार से मिलने 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचे। करीव आधे घंटे इंतजार बाद दोनों नेताओं के बीच नजर भर मिली,कोंई खास बातचीत नही हुई। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। क्या आरसीपी की गर वापसी में  कंई अवरोध बने । जदपू अथ्यक्ष नीतीश कुमार के लंबे समय तक अत्यंत करीब रहे आरसीपी सिंह घर वापसी को बेताव, सुबह-सुबह मिलने पहुंचे, हुई मुलाकात,नहीं बनी वात
पटना,27 जून।  जदयू राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई । जदयू के पूर्व अथ्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरसीपी सिंह शनिवार को नीतीश कुमार से मिलने 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचे। नीतीश कुमार के बिल्कुल सामने थे आरसीपी सिंह, मगर वो किसी दूसरे कार्यकर्ता से बात कर निकल गए। आरसीपी सिंह को देखा तक नहीं। बिहार के राजनीतिक गलियारों में शनिवार को एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। करीव आधे घंटे इंतजार बाद दोनों नेताओं के बीच शायद नजर भर मिली या नहीं,कोंई खास बातचीत नही हुई। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। क्या आरसीपी की गर वापसी में कई अवरोध बने ।
 आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार के आवास के अंदर एंट्री की अनुमति तो मिल गई थी, लेकिन उन्हें सीधे मिलने का समय नहीं दिया गया। वे काफी देर तक आवास के बरामदे में बैठकर नीतीश कुमार का इंतजार करते रहे। इसी बीच जब नीतीश कुमार अपने कमरे से बाहर निकले, तो अचानक उनकी नजर वहां बैठे आरसीपी सिंह पर पड़ी। आरसीपी सिंह ने तुरंत खड़े होकर उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया, लेकिन नीतीश कुमार ने किसी आम कार्यकर्ता की तरह महज इशारों में उनके प्रणाम का जवाब दिया और बिना रुके वापस अंदर चले गए।
आरसीपी के साथ आये समर्थकों ने आवास से बाहर हंगामा किया।ललन सर्राफ और संजय गांधी पर नाराजगी दिखाई। सीधा आरोप लगाया कि इन दोनों ने जानबूझकर राजनीति के तहत नहीं मिलने दिया।
 आरसीपी और नीतीश के बीच मतभेद बढ़ने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर किया गषा था।
 यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे आरसीपी सिंह ने नीतीम के रेल मंत्री और सीएम रहते लंबी प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीति प्रवेश की और तेजी से पार्टी में सर्वेसर्वा हो गये। संगठन, चुनावी रणनीति और बड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही.। नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेजा और बाद में जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया। उन्हें नीतीश का दाहिना हाथ माना जाता था। जदयू कोटे 
से अध्यक्ष रहते केन्द्रीय वनने के बाद समीकरण बिगड़ा। पारटी छूट,मंत्री पद गया। भाजपा में शामिल हुए पर न टिकट मिला और न चुनाव में भूमिका मिली। भाजपा से नाता तोडड़ अपनी पार्टी वनाई। जनसुराज में जा मिले। अव जदयू में वापसी को वेताव है। जदयू में परिस्थितियां बदली हैं। उम्र और सेहत के कारण नीतिश की पहले बाली स्थिति नहीं है। संजय झा के कार्यकारी अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह का पार्टी पर दबदबा के बीच आरसीपीकी घर वापसी नहीं हो पा रही है।
समर्थकों ने क्यों किया हंगामा?आरसीपी और नीतीश  के बीच मतभेद बढ़ने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर किया गषा था।
 यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे आरसीपी सिंह ने  नीतीम के रेल मंत्री और सीएम रहते लंबी प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीति प्रवेश  की और तेजी से पार्टी में सर्वेसर्वा हो गये। संगठन, चुनावी रणनीति और बड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही.। नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेजा और बाद में जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया। उन्हें नीतीश का दाहिना हाथ माना जाता था। जदयू कोटे से अध्यक्ष रहते 
केन्द्रीय वनने के बाद समीकरण बिगड़ा। पारटी छूट,मंत्री पद गया। भाजपा  में शामिल हुए पर न टिकट मिला और न चुनाव में भूमिका मिली। भाजपा से नाता तोडड़ अपनी पार्टी वनाई। जनसुराज में जा मिले। अव जदयू में वापसी को वेताव है। जदयू में परिस्थितियां बदली हैं। उम्र और सेहत के कारण नीतिश की पहले बाली स्थिति नहीं है। संजय झा के कार्यकारी अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह का पार्टी पर दबदबा के बीच आरसीपीकी घर वापसी नहीं हो पा रही है।



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