पंचायतों के परिसीमन के लिए बनेगा विशेष आयोग
अरुण कुमार पाण्डेय
पटना.09 अगस्त। विहार में त्रिस्तरीय पंचायतों का 2011 की 8.28 करोड़ की जनगणना पर परिसीमन के लिए आयोग बनेगा। नये परिसीमन में तय मानक के अनुसार 500 की आबादी पर ग्राम पंचायतों का वार्ड.7000 की आबादी पर ग्राम पंचायत.5000 की आबादी पर पंचायत समिति का वार्ड और 50 हजार की आबादी पर जिला परिषद सदस्य का वार्ड बनेगा। मुखिया-सरपंचों की संख्या 8041 से बढ़कर 12,500 हो जायेगी। 
पंचायती राज विभाग द्वारा परिसीमन के लिंए संकल्प जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार वर्तमान 8071 ग्राम पंचायतों से 7338 ग्राम पंचायतों में 8 हजार से 20 हजार तक और12 ग्राम पंचायतों 20 हजार से अधिक की आबादी है। जिला परिषद के 1160 वार्डों से 987 वार्डों में 60 हजार से 1.50 लाख तक की आबादी है।
बिहार में दो दशक में दूसरी बार पंचायत पंचायत चुनाव टलने जा रहा है। दिसम्बर से 15 जनवरी तक पंचायतों का शपथग्रहण सें पांच वर्षों की कार्यावधि षमाप्त होन जाने पर चुनाव दूसरी बार वर्तमान सभी निर्वाचित प्रतिनिधि नये चुनाव तक परामर्शी की भूमिका में अपना दायित्व संभालेंगे।

 पुराने परिसीमन 1991 की जनगणना और 1993-94 के परिसीमन पर पाच बार हुंए चुनाव के बाद पहली बार ईवींएम मशीन से आरक्षणक्रम में बदलाव के साथ इसी वर्ष नवम्बर-दिसम्बर तक नियत समय चुनाव कराने की प्रशासनिक तैयारी थम गयी है। 
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पचायत चुनाव की प्रशासनिक तैयारिया तेज होने के बीच निर्णय लिया कि 33 वर्ष पहले के परिसीमन की वजाय नया परिसीमन पर चुनाव का होगा। यह निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। 
2011 की जनगणना के आधार पर ही त्रिस्तरीय पंचायत निकायों का परिसीमन के बाद चुनाव का निर्णय हुआ है। प्रत्येक 10 वर्षों पर होने वाली 2021 मैं जनगणना कोरोना की परिस्थितिवश टलती रही।अब 2026 में जनगणना की प्रक्रिया चालू है। यह 2027 में पूरी होगी। 
अब तो केम्द् सरकार भी लोकसभा और विधानसभाओं का भी परिसीमन 2011 की जनगणना पर कराने की तैयारी में है।इसको लेक संद के चालू सत्र में 131वां संविधान संशोध। के तहत महिलाओं के लिंए लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटें सुरक्षित करने हेतु पहले परिसीमन की तैयारी है ताकि 2029 के चुनाव में इसे लागू किया जाय।
बिहार अब अगले वर्ष जुलाई-अगस्त में पंचायत चुनाव संभव होगा । नया परिसीमन से पंचायत निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या 55% बढ़ जायेगी। मुखिया-सरपंचों की संख्या 8041 से बढ़कर 12,500 हो जायगी। 
नये परिसीमन में मानक के तहत 500 की आबादी पर ग्राम पंचायतों का वार्ड.7000 की आबादी पर ग्राम पंचायत.5000 की आबादी पर पंचायत समिति का वार्ड और 50 हजार की आबादी पर जिला परिषद सदस्य का वार्ड बनेगा।
 सम्राट चौधरी सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्धिक रूप से सबल बनाने के ध्येय उद्देश्य से 2006 के बिहार पंचायतीराज अधिनियम के तहत पहली बार हरी झंडी देकर कर/शुल्क वसूलने की कानूनी शक्ति भी दे दी है। इसके तहत शहरों की तरह गांवों में भी होल्डिंग टैक्स सहित कई नये शुल्क की वसूली होगी। 
सम्राट चौधरी पहले पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं।

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