लोकसभा के आगामी चुनाव से पहले परिसीमन, महिलाओं के 33%आरक्षण के लिए 50% बढ़ेगी सीटें
लोकसभा और विधान सभाओं 33% महिला आरक्षण संबंधी "नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023" में महत्वपूर्ण पहला संशोधन होगा। लोकसभा का अगला चुनाव 2029 में होगा। उसके पहले 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसा क्षेत्रों का नया परिसीमन होगा।इसके लिए आयोग बनेगा। लोकसभा और विधान सभा क्षेत्रों की संख्या 50% की बढोतरी होगी। लोकसभा की सीटें 544 से बढ़ाकर 816 होंगी।
इसी तरह बिहार में लोकसभा की सीट 40 से बढ़कर  60 और विधानसभा की सीटें 243 की जगह 365 होंगी। एक तिहाई महिला होंगी!
केंद्र की  नरेंद्र मोदी सरकार महिला आरक्षण संशोधन बिल लाने की तैयारी में है। इसे 2029 लोकसभा चुनाव से ही लागू करने का योजना है।  पहले की योजना के अनुसार नयी जनगणना के बाद परिसीमन होना था ।कोरोना की महामारी के कारण प्रत्येक 10 वर्षो  इसके बाद बिहार में लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ जाएंगी।
 केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकारआगामी चुनावों से पहले केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य इस कानून के लागू होने को 2027–28 में प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया से अलग करना है। 
प्रस्तावित ढांचे की मुख्य बातें
सरकार जिन अहम बदलावों पर विचार कर रही है, उनमें शामिल हैं:
सीटों में बढ़ोतरी, राज्यों को नुकसान नहीं:
लोकसभा सीटों में 50% तक वृद्धि का प्रस्ताव, ताकि किसी राज्य की मौजूदा सीटें कम न हों।
रोटेशन सिस्टम:
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें तीन चुनावों तक स्थिर रहेंगी, उसके बाद रोटेशन लागू होगा।
कोटा में कोटा:
एससी/एसटी आरक्षित सीटों में भी 33% महिला आरक्षण लागू किया जाएगा।
जनगणना आधार:
सीटों का आवंटन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा, ताकि देरी से बचा जा सके।संवैधानिक संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, ऐसे में सरकार विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश में है।लोकसभा सीटों में प्रस्तावित बढ़ोतरी से बड़े राज्यों को ज्यादा फायदा मिल सकता है:
उत्तर प्रदेश: 80 → 120
महाराष्ट्र: 48 → 72
पश्चिम बंगाल: 42 → 63
बिहार: 40 → 60
तमिलनाडु: 39 → 59
इसके अलावा मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी सीटें बढ़ेंगी।
नॉर्थ–साउथ में क्या होगा?
सीटों की कुल हिस्सेदारी में बदलाव नहीं होगा, लेकिन आबादी के आधार पर उत्तरी राज्यों में सीटों की संख्या ज्यादा बढ़ेगी, जिससे दक्षिणी राज्यों में प्रतिनिधित्व को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।
2029 के लोकसभा चुनाव और 2030 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण के नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में महत्वपूर्ण संशोधन करने के मूड में है। इस नए प्रस्ताव के तहत बिहार में न केवल सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि सदन में महिलाओं की मौजूदगी भी एक-तिहाई अनिवार्य हो जाएगी।
सरकार का प्रस्ताव है कि 2011 की ही जनगणना को आधार मानकर लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए। वर्तमान कानून के अनुसार, जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होना था, लेकिन सरकार अब संशोधन के जरिए इस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है, ताकि 2029 के चुनाव तक इसे लागू किया जा सके। 
 बिहार में वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या 40 है, जो बढ़कर 60 हो जाएगी। इसमें 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी तरह बिहार विधानसभा में अभी 243 सीटे हैं, जो बढ़कर 365 हो सकती है। इनमें करीब 122 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
आगामी चुनावों से पहले केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य इस कानून के लागू होने को 2027–28 में प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया से अलग करना है। 
प्रस्तावित ढांचे की मुख्य बातें
सरकार जिन अहम बदलावों पर विचार कर रही है, उनमें शामिल हैं:
सीटों में बढ़ोतरी, राज्यों को नुकसान नहीं:
लोकसभा सीटों में 50% तक वृद्धि का प्रस्ताव, ताकि किसी राज्य की मौजूदा सीटें कम न हों।
रोटेशन सिस्टम:
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें तीन चुनावों तक स्थिर रहेंगी, उसके बाद रोटेशन लागू होगा।
कोटा में कोटा:
एससी/एसटी आरक्षित सीटों में भी 33% महिला आरक्षण लागू किया जाएगा।
जनगणना आधार:
सीटों का आवंटन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा, ताकि देरी से बचा जा सके।संवैधानिक संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, ऐसे में सरकार विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश में है।लोकसभा सीटों में प्रस्तावित बढ़ोतरी से बड़े राज्यों को ज्यादा फायदा मिल सकता है:
उत्तर प्रदेश: 80 → 120
महाराष्ट्र: 48 → 72
पश्चिम बंगाल: 42 → 63
बिहार: 40 → 60
तमिलनाडु: 39 → 59
इसके अलावा मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी सीटें बढ़ेंगी।
नॉर्थ–साउथ में क्या होगा?
सीटों की कुल हिस्सेदारी में बदलाव नहीं होगा, लेकिन आबादी के आधार पर उत्तरी राज्यों में सीटों की संख्या ज्यादा बढ़ेगी, जिससे दक्षिणी राज्यों में प्रतिनिधित्व को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।

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