बिहार के सभी 38 जिलों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में मात्र 10 रूपये तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों में 5 रूपये शुल्क पर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध

तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप और डिजिटल विकास से राज्य को नई गति मिलेगी :- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह का किया शुभारंभ। जमुई, किशनगंज एवं सुपौल के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में पूर्ण हुई विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण।

युवाओं से आह्वान - नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पुनर्स्थापन किया जा रहा है, जिसके लिए 220 एकड़ भूमि भारत सरकार को उपलब्ध कराई जा चुकी है।

मुजफ्फरपुर में आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय तथा भागलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।

पटना 18 जुलाई  :- मुख्यमंत्री सह बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय, पटना के कुलाधिपति श्री सम्राट चौधरी ने आज सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र परिसर स्थित ज्ञान भवन में आयोजित बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय, पटना के तृतीय दीक्षांत समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 के बी0टेक एवं एम०टेक के मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, प्रशस्ति पत्र तथा 50,001 रूपये का चेक प्रदान किया। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि बिहार के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला अवसर है। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे सिर्फ नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि बिहार एक अनोखा राज्य है, जहां सभी 38 जिलों में स्थापित इंजीनियरिंग कॉलेजों में मात्र 10 रूपये तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों में 5 रूपये शुल्क पर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसी व्यवस्था शायद दुनिया में कहीं नहीं है। किसी इंजीनियर की वास्तविक पहचान उसकी डिग्री से नहीं बल्कि उसके द्वारा किए गए नवाचार, तकनीकी दक्षता और समाज के लिए किए गए निर्माण कार्यों से होती है। 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था ज्ञान, डेटा, तकनीक और नवाचार पर आधारित है। शैक्षणिक रूप से सर्वाधिक विकसित राज्य ही आर्थिक नेतृत्वकर्ता बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बिहार के युवा शोध, संवाद और आधुनिक तकनीक के साथ ज्ञान अर्जित करेंगे, तभी बिहार विकसित और समृद्ध बनेगा। बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पुनर्स्थापन किया जा रहा है, जिसके लिए 220 एकड़ भूमि भारत सरकार को उपलब्ध कराई जा चुकी है। मुजफ्फरपुर स्थित एम०आई०टी० में आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय तथा भागलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार ए०आई० और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तकनीक एवं नवाचार के माध्यम से वैश्विक मानकों के अनुरूप विकास को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से बिहार टेक में अपना सुझाव देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप और डिजिटल विकास से राज्य को नई गति मिलेगी। इनोवेशन और स्टार्टअप से ही भारत विकसित और बिहार समृद्ध बनेगा। राज्य सरकार युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, जमुई में 3.49 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित अतिरिक्त बालिका छात्रावास तल, राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, किशनगंज में 77.58 करोड़ रूपये की लागत से कराए गए अतिरिक्त विकास कार्य तथा अभियंत्रण महाविद्यालय, सुपौल में 26.02 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित 300 बेड वाले अतिरिक्त बालिका छात्रावास भवन का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० सुरेश कांत वर्मा ने मुख्यमंत्री को पौधगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजेंद्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव श्री हिमांशु शर्मा, बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० सुरेश कांत वर्मा, कुलसचिव डॉ० प्रदीप कुमार सहित बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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