राज्यसभा से भी लोक परीक्षा बिल पारित, अब राष्ट्रपति कीस्वीकृत का इंतजार.पीएम ने की मुलाकात

नई दिल्ली। राज्यसभा में भी लोक परीक्षा संशोधन विधेयक.2026 आज हो गया। विपक्ष के हंगामें के बीच कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। 
विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई, जबकि सरकार ने इसे गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया। 
 लोकसभा मे पहले पारित लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में पूरे दिन चली चर्चा के बाद कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। यह वॉकआउट उस समय हुआ, जब कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह विधेयक पर सरकार की ओर से जवाब देने के लिए खड़े हुए। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए और उनके सदन में आने की मांग की।

पूरे दिन चली बहस के बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने जितेंद्र सिंह को चर्चा का जवाब देने के लिए बुलाया। इसी दौरान राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि बहस के दौरान लाठीचार्ज और गोलीबारी जैसे मुद्दे उठाए गए हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री नहीं आए हैं, इसलिए पहले उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
विपक्ष के वॉकआउट के बाद केन्द्रीय मंत्री एवं सदन के नेता जेपी नड्डा ने इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इससे साफ हो गया है कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। करीब आठ घंटे तक चर्चा चली और हर सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मंत्री जवाब देने के लिए खड़े हुए, तभी प्रमोद तिवारी ने विरोध शुरू कर दिया, जो गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है।
विधेयक में पेपर लीक या अनुचित साधनों में शामिल किसी भी व्यक्ति के लिए न्यूनतम जेल की सजा को बढ़ाकर तीन से पांच साल और अधिकतम जेल की सजा को पांच साल से बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रावधान है। इसके अलावा जुर्माने को अधिकतम 10 लाख से 50 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा संगठित अपराधों के मामले में विधेयक में कम से कम सात साल की जेल (जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकेगा) और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का भी प्रस्ताव है।
 अगर कोई परीक्षा कराने वाली कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उस पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे आठ साल तक कोई भी सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। 
दोषी फर्म के वरिष्ठ प्रबंधन को भी कम से कम पांच से 10 साल तक की जेल और पांच करोड़ रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। वहीं, धांधली में शामिल दोषी संस्थानों और माफियाओं की संपत्तियों को कुर्क और जब्त भी किया जा सकेगा।
 सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार दिया जाएगा। इन अदालतों में दिन-प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई होगी। 
पेपर लीक मामलों की जांच भी दो महीने के अंदर पूरी किया जाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा किया जाने का नियम भी रखा गया है।
 यह संशोधन विधेयक केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी देता है।
इस विधेयक में पढ़ाई करने वाले आम और नियमित छात्रों के हितों की पूरी सुरक्षा का ध्यान रखा गया है। परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को इन गंभीर आपराधिक और दंडात्मक धाराओं से बाहर रखा गया है। इससे निष्पक्ष परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों पर बेवजह कोई कानूनी दबाव नहीं पड़ेगा।
 


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