लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पर फैसला होने तक सदन में नहीं जाने की ठानी,9 मार्च को होगी चर्चा

कांग्रेस का स्पीकर खिलाफ मोर्चा, 119 सांसदों के हस्ताक्षर से नोटिस 
नई दिल्ली, 10 फरवरी।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने पर फैसला होने तक स्पीकर ने सदन में नहीं जाने की ठानी है। 9 मार्च को सदन में चर्चा होगी।
कांग्रेस ने स्पीकर खिलाफ मोर्चा खोला है। 119 सांसदों के हस्ताक्षर से नोटिस दी गई है। इसमें विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल उठ गया है। टीएमसी के 18 सांसदों रहते किसी हस्ताक्षर नही है।आप की सहभागिता नहीं है।
मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया। यह नोटिस विपक्ष के नेता के. सुरेश और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अविश्वास प्रस्ताव पर 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर नियम 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन में पक्षपात हो रहा है, विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है। 
उधर पूर्व सेनाध्यक्ष निवाले की जिस किताब के हवालात विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने कि मौका नहीं दिए जाने को लेकर विवाद छिड़ा है,वह अब तक प्रकाशित नहीं होने का तथ्य उजागर होने से नया विवाद हो गया है।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया कुछ इस तरह से हैं। संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा नियम 200 के अनुसार स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया इस प्रकार है। इस प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद कम से कम 14 दिन का इंतजार अनिवार्य है। इसके बाद सदन में प्रस्ताव को सूचीबद्ध किया जाता है. प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 सांसदों को हाथ उठाकर समर्थन देना होगा। अगर 50 सांसदों का समर्थन मिलता है, तो चेयर (सदन की ओर से) प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे सकती है. चर्चा के बाद यदि बहुमत से प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो स्पीकर को पद से हटाया जा सकता हैं।वर्तमान बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है।




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