संसद की 4 अहम समितियों  का गठन,  लोक लेखा,प्राक्कलन और राजकीय उपक्रम  और  समिति शामिल

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 2026-27 के लिए तीन वित्तीय और एक स्थायी समिति का पुनर्गठन किया। 
केसी वेणुगोपाल, फग्गन सिंह कुलस्ते, बैजयंत जय पांडा और संजय जायसवाल अध्यक्ष बनाये गये। ये समितियां सरकारी कामकाज की समीक्षा, खर्च की जांच और नीतिगत सुझाव देकर संसद की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संसद की चार महत्वपूर्ण समितियों का फिर से गठन कर दिया है। संसद के दोनोः सदनों कके सदस्यों की इन समितियों में सहभागिता होती है।
इनमें तीन वित्तीय समितियां - लोक लेखा ,प्राक्कलन व राजकीय उपक्रम और अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति शामिल हैं। यह स्थायी संसदीय समिति है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को लोक लेखा समिति का दोबारा अध्यक्ष  बनाया गया है। पीएसी के अधिकतम 22 सदस्य होते हैं। इनमें 15 सदस्य लोकसभा से चुने जाते हैं और अधिकतम 7 सदस्य राज्यसभा से होते हैं।
इन समितियों का गठन हर साल किया जाता है।  इन समितियों का पिछला कार्यकाल 30 अप्रैल को खत्म हो गया था। इसके बाद 1 मई 2026 से इनका नया कार्यकाल शुरू हुआ है, जो अब 30 अप्रैल 2027 तक चलेगा।
कई पुराने चेहरों को इस बार भी समिति का अध्यक्ष  बनाए रखा गया है। 
BJP सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति का अध्यक्ष फिर से बनाया गया है।अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण से जुड़ी यह समिति कुल 30 सदस्यों की होती है। इसमें 20 सदस्य लोकसभा से चुने जाते हैं, जबकि 10 सदस्य राज्यसभा से आते हैं।
BJP के बैजयंत जय पांडा को लोक उपक्रम समिति और डा.संजय जायसवाल को प्राक्कलन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी एक बार फिर सौंपी गई है।
लोक उपक्रम समिति  में कुल 22 सदस्य होते हैं। इनमें से 15 सदस्य लोकसभा द्वारा चुने जाते हैं और 7 सदस्य राज्यसभा द्वारा नामित किए जाते हैं।प्राक्कलन समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं।

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