क्या जेल से कोई सीएम सरकार चलायेगा?
अरुण कुमार पाण्डेय 
संविधान निर्माताओं शायद कल्पना भी नहीं की होगी की किसी पीएम या सीएम को पद पर रहते गिरफ्तार करने की भी नौबत आयेगी। जिस तरह राष्ट्रपति और राज्यपाल को काननून संरक्षण मिला हि पद पर रहते न कोई मुकदमा दर्ज होगा और गिरफ्तारी होगी,काश! उसी तरह का कानूनन प्रावधान पीएम और सीएम के लिए भी कर दिया जाता। आज देश के समक्ष या सवाल मौजू हो गया है जब पहली बार किसी मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी हुई है और यह गर्वोयुक्ति सुनने को मिल रही है कि  केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे।दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने कहा है कि केजरीवाल मुख्यमंत्री बने रहेंगे और जेल से ही सरकार चलाएंगे। 
आजादी के बाद यह पहली बार ही है जब किसी मुख्यमंत्री ( दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल) को गिरफ्तार किया गया है। पहले के कई ऐसे उदाहरण जरूर आए हैं और  गिरफ्तारी से ऐन पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे हुए हैं।  हाल का  उदाहरण झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का है। 

31 जनवरी 2024 को कथित रक्षा भूमि घोटाला मामले में ईडी ने सोरेन को उनके आवास जाकर पूछताछ की। हिरासत में लिया। हेमंत सोरेन ने  राजभवन जाकर खुद इस्तीफा कर चम्पई सोरेन के नेतृत्व में नयी सरकार बनाने का पत्र दिया था। इससे पहले 31 जनवरी को ही उन्होंने झारखंड के राज्यपाल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। 

इसके पहले भी  तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की गिरफ्तारी हुई थी। भाडपा के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने जयललिता के खिलाफ मामला दायर किया और आरोप लगाया कि 1991 से 1996 तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक की संपत्ति अर्जित की। 7 दिसंबर, 1996 को जयललिता की गिरफ्तार कर ली गई।  5 दिसंबर, 1996 तक जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं।
 1997 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को चारा घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। 30 जुलाई, 1997 को लालू यादव ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था। इससे पहले 25 जुलाई, 1997 को लालू ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद लालू की पत्नी राबड़ी देवी सीएम बनी थीं।

इसी तरह का  मामला कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से जुड़ा है। साल 2011 में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को जमीन मामले में जेल जाना पड़ा था। येदियुरप्पा ने 15 अक्तूबर, 2011 को लोकायुक्त अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इससे पहले 31 जुलाई, 2011 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

 अब ताजा उदाहरण दिल्ली के  सीएम अरविंद केजरीवाल का है। गिरफ्तारी की नौबत देख वे इससे बचने की कानूनी लड़ाई की पर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
अब यह लाख टके का सवाल ही गया है कि जेल से सरकार चलाना, क्या संभव है? 
 इस बारे में  संविधान के जानकार कहते हैं, कानून की नजर में गिरफ्तारी होना दोष सिद्धि नहीं माना जाता है। ऐसे में किसी मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनसे इस्तीफा नहीं लिया जा सकता है। यह तो संविधान और कानून की मर्यादा रखने का सवाल है। जब कोई शरकारी सेवक जेल जाने पर 48 घंटे बाध निलंबित हो जाता है तव सीएम ऐसी स्थिति में पद पर कैसै बने रह सकता हैं?

जेल से सरकार चलाने के सवाल पर कानून के जानकार कहते हैं, "जेल से सरकार चलाना जेल के नियमों पर काफी निर्भर करेगा। इसमें जहां तक व्यवहारिकता की बात है तो मुख्समंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कैबिनेट की मीटिंग ले सकते हैं। अब अगर ये सवाल उठता है कि जेल से कैबिनेट या मंत्रियों के साथ बैठक कैसे होगी तो इसके लिए जेल प्रशासन की मंजूरी लेना जरूरी होगी। अगर जेल प्रशासन मुख्यमंत्री को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक लेने की अनुमति नहीं देता है तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।"

 "किसी राज्य की सरकार को सुचारू रूप से चलाने के लिए गिरफ्तारी की नौबत या  जेल जाने के पहले मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ता है। "
 जैल नियमों के तहत किसी कैदी को सप्ताह में दो दिन परिजन से मिलने की छूट मिल सकती है। यह सब जेल अधीक्षक की अनुमति पर ही संभव है। जेल से कैदी कोई पत्र भी जेल अधीक्षक की अनमति और माध्यम बाहर किसी को भेज सकता है।अब यह सवाल उठना लाजमी है कि दिल्ली प्रशासन सीएम से अपेक्षित आदेश-निर्देश की अपेक्षा लेकर लालघर का दरवाजा खटखटाने जायेगा? यह कल्धना से परे है। मौजूदा स्थिति में दिल्ली के उप राज्यपाल के रुख और रवैये पर ही  अरविंद केजरीवाल का सीएम पद पर बना रहना मुमकिन होगा। दिल्ली के उप राज्यपाल ने ही आबकारी नीति मैं घोटाले की सीबीआई जांच कराने की पहल की थी। इसी मामले में सीबीआई जांच की रिपोर्ट के आधार पर ईडी का मामला बना है। सीएम अरविंद केजरीवाल के पहले ईडी मामले में ही डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और मंत्री सत्येन्द्र जैन जेल में हैं।
देश में हाल के वर्बों में कई उदाहरण देखने को मिले हैं कि गिरफ्तारी और जेल में रहते दिल्ली,पश्चिम बंगाल और तमिलनाड के मंत्रियों ने कई महीने तक इस्तीफा नहीं किया।एक उदाहरण यह भी बना कि मंत्री के जेल जाने पर राज्यपाल ने मंत्री को बर्खास्त कर दिया।सीएम की आपत्ति और विरोध पर राज्यपाल को अपना आदेश निरस्त करना पड़ा। 
इस मुद्दे पर बहस छिडना अपेक्षित है।

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