पटना हाईकोर्ट से 15 सितंबर 2021 के पहले  सड़क दुर्घटना में मृत या घायल व्यक्तियों के परिवारों को  बड़ी राहत
शिवम द्विवेदी 

पटना . 15 सितंबर 2021 के पहले  सड़क दुर्घटना में मृत या घायल व्यक्तियों के परिवारों को पटना हाईकोर्ट से मंगलवार को बड़ी राहत मिली है.  हाईकोर्ट ने कहा कि वैसे परिवार जो  किसी कारणवश  15 सितंबर 2021 के पहले वाहन दुर्घटना में मृत या घायल हुए अपने परिवार के सदस्यों के मुआवजे के लिए मुकदमा संबंधित जिले के जिला न्यायालय में दायर नही किये हैं वे  अब वहां दायर कर सकते हैं.
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नई अधिसूचना के बाद घटित किसी भी घटना के मुआवजा के लिए नया मुकदमा नई गठित न्यायाधिकरण  में दायर किया जा सकता है.
मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश एस कुमार की खंडपीठ ने रेनू देवी द्वारा  याचिका पर  वरीय अधिवक्ता पुष्कर नारायण शाही,  अधिवक्ता राजन सहाय ,सीमा  और राज कुमार को सुनने के बाद यह निर्देश दिया.
कोर्ट को याचिकाकर्ता द्वारा यह बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा 15 सितंबर 2021 को  बिहार मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (संशोधन- 1) नियमावली 2021 से संबंधित अधिसूचना जारी की गई .इसमें यह कहा गया कि अधिसूचित किए जाने की तिथि से वाहन जनित दुर्घटनाओं के उदभूत मुआवजा बाद राज्य सरकार द्वारा गठित राज्य स्तरीय दावा न्यायाधिकरण में ही दायर किया जा सकेगा.  उन मुआवजा वादों का निष्पादन राज्य स्तरीय दावा न्यायाधिकरण द्वारा बिहार मोटर गाड़ी (संशोधन -1) नियमावली  2021 के विहित प्रावधानों के अंतर्गत किया जाएगा.
श्री शाही ने अदालत को बताया नए नियमावली के आ जाने के बाद 15 सितंबर 2021 के पहले वाहन दुर्घटना में मृत या घायल हुए व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों द्वारा  इस मामले को लेकर जो भी मुकदमा मुआवजे के लिए  जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में दायर होता है तो यह कह कर उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है कि नई नियमावली आ गई है और आप का मुकदमा अब नई नियमावली के तहत राज्य स्तरीय वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में ही दायर होगा . याचिकाकर्ता का कहना था कि बहुत ऐसे व्यक्ति है जिनके परिवार के सदस्य की मृत्यु या दुर्घटना इस नियमावली के आने के पहले हुई है और उनके द्वारा किसी भी कारणवश संबंधित न्यायालय में दावा के लिए मुकदमा दायर नहीं किया गया है अगर उन्हें संबंधित  जिला अदालत में मुकदमा दायर करने की अनुमति नहीं मिलेगी  तो उन्हें काफी परेशानी होगी  क्योंकि नए नियम के आ जाने के बाद इन लोगों का मुकदमा वाद न तो संबंधित जिला अदालत में दायर किया जा रहा था और ना ही नए दावा न्यायाधिकरण में ही. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की बातों को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया.

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