सेहत: होमियोपैथी में विषाणु जनित नेत्र प्रदाह का जाने ईलाज
आंख शरीर का सबसे कोमल अंग है । आंखों की चमक सबसे ऊपर कंजक्टाइवा होती है इस भाग पर जीवाणु विषाणु के संक्रमण ,चोट या रसायन के कारण जब प्रदाह हो जाता है तो इसे कंजक्टिवाइटिस कहां जाता है। आज  हम वायरल कंजक्टिवाइटिस अथवा विषाणु जनित नेत्र प्रदाह के बारे में चर्चा करगें। आंखों का प्रदाह किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकता है यह छूत की बीमारी है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है वायरल कंजेक्टिवाइटिस किसी भी मौसम में हो सकता है परंतु गर्मी और बरसात के मौसम में इसके फैलने की  संभावना ज्यादा रहती है , यह  किसी को भी हो सकता है
 महामारी के रूप में इससे प्रभावित हो जाते हैं जब इसका संक्रमण तेजी से फैलने लगता है तब लोगे इससे बचाव के लिए गली चौराहा दफ्तरों में काला चश्मा चढ़ाए मिल जाती है।

1-क्या लक्षण है इस रोग में 
आंखों में बालू पड़ने जैसी गड़़न/चुभन ।
आंखों से आंसू निकलने लगते हैं तथा पलकों में सूजन आ जाती है।
धूप और तेज रोशनी से तकलीफ बढ़ जाती है। कभी-कभी विषाणु संक्रमण के साथ-साथ जीवाणु संक्रमण होने पर आंखों में कीचड़ बनने लगते हैं।
कजंक्टाइवा की सतह पर रक्त श्राव  भी हो सकता है, वैसे तो यह रोग सामान्यतः तीन-चार दिन में ही ठीक हो जाता है परंतु लापरवाही की स्थिति में कुछ जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती है उपचार में समय लग सकता है इसलिए कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है।

2-इस बीमारी से बचने के लिए क्या करें।
ऐसे ही फैलने वाली बीमारी है इसलिए इससे निम्न  सावधानियां अपनाकर बचा जा सकता है
जिस व्यक्ति की आंखों में बीमारी हो उसका चश्मा रुमाल का प्रयोग  अन्य कोई वस्तु नहीं प्रयोग करना चाहिए।
रोग प्रभावित व्यक्ति से दूर रहें तथा बीमार व्यक्ति को दूसरे से ज्यादा घुलने मिलने ना दें गंदगी ‌ से बचें तथा उपचार में विलंब ना करें
3-रोग हो जाने पर क्या करें
आंखों पर काला चश्मा लगाएं
आंखों को साफ रखें एवं ठंडे पानी से कई बार धोएं।
पूरी तरह आराम करें वह आंखों में किसी तरह के जोड़ न दें।
कपड़े को  सफाई पर ध्यान दें।
उपचार में विलंब ना करें।4-कंजक्टिवाइटिस का होमियोपैथी उपचार-
इस रोग के उपचार में एलोपैथिक दवाइयां ज्यादा प्रभावी नहीं है परंतु यदि होमियोपैथी दवाइयां ली जाए इससे मुक्ति पाई जा सकती है। इस रोग के उपचार में नीम्न दवाइयां प्रमुख रूप से प्रयोग की जा सकती है
1-बेलाडोना प्रथम अवस्था में जब आंखें लाल हो जलन बहुत दर्द और सुखी हो यह दवा ली जा सकती है।
2-आर्सेनिक एल्बम -आंसू , रात्री में जलन जैसा दर्द हो तो यह दवा ली जा सकती है।
3-एपिस मेल :जब पलकों आस पास के ऊतकों में सूजन एवं चुभन जैसा दर्द रहने पर बहुत कारगर है। 
 4-यूफ्रेसिया ज्यादा आंसू जलन तीखा स्राव, पीला पलकों को खुरदरा बना दें।
5-हिपर सल्फर धूप बर्दाश्त ना हो ज्यादा आंसू आंखें लाल पलकें सूजी सोना बर्दाश्त नहीं ऐसी स्थिति में बहुत कारगर है।
6-कालीबाई- आंखों का कीचड़ बहुत चिपकने वाला, इसके अतिरिक्त दवा -मर्क सोल , पल्सेटिला, हेमामेलिस आदि दवाइयां भी प्रयोग की जा सकती है परंतु रोगियों के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह से ही दवा इस्तेमाल करें।  
 डॉ लक्ष्मी नारायण सिंह 
फोन नंबर 9204090774 

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