पटना कलम के चित्रों ने आम जनजीवन को दी कला की भाषा: श्याम शर्मा

*पटना। 07 जुलाई ।
गांधीजी ने जब विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया तो चित्रकारों के समक्ष कंपनी शैली के प्रभाव को अलग करने का बड़ा संकट पैदा हो गया। तब चित्रकारों ने निष्कर्ष निकाला कि भारत कला की आत्मा लोक में बसती और विकसित होती है। पटना कलम ने इसी लोक को कला की भाषा प्रदान की। ये बातें इंटैक, योर हेरिटेज एवं अरुणोदय के संयुक्त तत्वावधान में सप्ताह भर चले पटना कलम पेंटिंग्स शैली प्रशिक्षण के समापन समारोह के संबोधन में पद्मश्री श्याम शर्मा ने कही। उन्होंने आगे कहा कि पटना कलम के गौरवशाली इतिहास में राज, समाज एवं सांस्कृतिक धरोहर छिपे हैं जिनके मोटिफ्स को क्राफ्ट्स के रूप में भी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के कलाकारों को पटना कलम पेंटिंग्स शैली में वर्तमान समाज का चित्रण करना चाहिए। प्रख्यात इतिहासकार तेजकर झा ने कंपनी शैली के भारत में विकास की चर्चा करते हुए हाजीपुर में अफीम एजेंट के रूप में पदस्थापित डी ऑयली का पटना कलम के विकास मे योगदान पर चर्चा किया। एनआईएफटी, पटना के रजनी श्रीवास्तव एवं जयंत कुमार ने पटना कलम की व्यवसायिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए आश्वस्त किया कि एक भी पेंटिंग कलाकारों के घर में नहीं रहेगी। कला समीक्षक कविता कानन ने पटना कलम की विशेषताओं का उल्लेख किया। आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए इंटैक, पटना के संयोजक भैरव लाल दास ने कहा कि पटना आर्ट कॉलेज से उत्तीर्ण छात्रगण अभी पटना कलम पर अभ्यास करने में संकोच करते हैं। जब तक कलाकारगण पटना कलम का अभ्यास शुरू नहीं करेंगे, इसे पुनर्जीवित नहीं किया सकता है। योर हेरिटेज की रचना प्रियदर्शिनी द्वारा आगत अतिथियों का सम्मान किया गया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अरुणोदय की कादम्बिनी सिन्हा ने कहा कि पटना कलम शैली का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे शहर में चलाया जाएगा। कार्यक्रम में आराधना तिवारी, रविशंकर उपाध्याय, गगन गौरव, राकेश झा, विष्णुजी आदि उपस्थित थे।

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