कबीर पंथी आश्रम में कबीर कथा का छठवां दिवस

पटना -कबीरपंथी आश्रम मीठापुर में आयोजित कबीर कथा के छठवें दिवस पर कथावाचक आचार्य गद्दी कबीर पीठ फतुहा के संरक्षक आचार्य मंहथ ब्रजेश मुनी महाराज ने कबीर कथा में सदगुरु कबीर साहेब की कथा का प्रसंग वर्णन करते हुए कहा- 
*एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट में बैठा।*
*एक राम का सकल पसारा, एक राम सबहूँ से न्यारा ।।*
कबीर साहब कहते हैं राम चार प्रकार के हैं, एक राम-तो राजा दशरथ के पुत्र थे जिन्होंने यहां राज किया। वो एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई तथा आदर्श राजा थे जब भी हम अपने मुल्क की बेहतरी की दुआ करते हैं तो यही कहते हैं कि यहां राम राज्य हो जाये। दूसरा वो राम
है, जो हमारे घट-घट में बैठा है और म
वो है हमारा मन। उसका काम है कि
वो हमें परमार्थ के रास्ते में तरक्की करने दे, यद्यपि हमारा मन भी ब्रह्म का अंश है, ब्रह्म का स्रोत है। परन्तु क वह अपने स्रोत को भूल चूका है और संत हमें समझाते हैं कि मन बैरी को मीत कर। तीसरा वो राम है जिसका ये सारा पसारा है इसमें माया भी है,
काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार भी है बाकी भी हर तरह की कशिश है, हमें इनसे बचने का प्रयास करना है करना चाहिए।
चौथा राम सबसे न्यारा है, सबसे ऊंचा है, सबसे बड़ी ताकत है, है, वही इस सृष्टि का कर्ताधर्ता है, हमारे जीवन का लक्ष्य तभी पूरा होता है जब हम, जितनी भी अवस्थाएँ हैं, उन सबसे गुजरकर है प्रभु को पा लें। संत जब भी बात करते हैं वो उसी राम का
जिक्र करते हैं। इसलिए सदगुरु कबीर साहेब के राम सबसे न्यारे है इस अवसर पर भारी संख्या मे श्रद्धालुओं की उपस्थिति थी।

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