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शराबबंदी को धत्ता,मोतिहारी में फिर बरपा का कहर
तेजस्वी ने सरकार को घेरा
पटना: बिहार में 10 वर्षों से लागू पूर्ण शराबबंदी की समीक्षा की उठ रही आवाज के बीच एक बार फिर शराब को ही लेकर चीख-पुकार मच गई है। पूर्वी चंपारण के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बालगंगा स्थित दलित बस्ती में जहरीली शराब ने फिर से कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। इस हृदय विदारक घटना में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब आधा दर्जन लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। दर्जनों लोग निजी अस्पतालों में जीवन और मौत जूझ रहे हैं।
त्रासदी की कड़वी हकीकत
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बालगंगा की दलित बस्ती में 40 से अधिक लोगों ने कथित तौर पर जहरीली स्प्रिट का सेवन किया था। इसके बाद अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।
दर्दनाक संयोग: गौरतलब है कि अप्रैल 2023 में भी इसी बालगंगा बस्ती में जिले का सबसे बड़ा जहरीली शराब कांड हुआ था, जिसमें दर्जनों लोगों ने जान गंवाई थी। ठीक उसी जगह दोबारा ऐसी घटना होना प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
तेजस्वी यादव का तीखा प्रहार: "शराबबंदी बनी मौतबंदी",अव तक 1300 की हुई मौत
इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस त्रासदी को महज एक हादसा नहीं बल्कि "सिस्टम की विफलता" करार दिया है।
तेजस्वी ने दावा किया कि शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक 1300 से अधिक लोग जहरीली शराब के कारण जान गंवा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा भयावह है।
राजद नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शराबबंदी अब जनहित का कानून नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षित भ्रष्ट तंत्र और शराब माफियाओं के लिए “कमाई की मशीन” बन गई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम जहरीली शराब बनाई और बेची जा रही है, जो अब घर-घर तक पहुंच रही है।
प्रशासनिक विफलता और खौफ का माहौल
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। कई पीड़ित परिवार कार्रवाई के डर से चोरी-छिपे निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। बालगंगा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शराबबंदी के बावजूद धरातल पर स्प्रिट और जहरीले तरल पदार्थों का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर बार-बार एक ही इलाके में ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? क्या प्रशासन की सख्ती सिर्फ कागजों तक सीमित है या फिर माफियाओं के हाथ सिस्टम से भी ज्यादा लंबे हैं?
बिहार में अप्रैल,2016 से शराबबःदी लागू है ।इससे संबंधित कानून के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई व सजा का प्रवधान है।शराबबंदी से सरकारी खजाने को 30हजार करोड के नुकसान का आकलन है । वहीं शराब का अवैध कारोबार होने और शराब माफिया का साम्राज्य कायम हो गया हो।12 लाख से अधिक मुकदमा और उससे अधिक व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई है। 4.50 करोड़ लीटर शराब जब्त कर नष्ट किये गये है।
बिहार में सीएम नीतीश कुमार कीशजगह नई सरकार बनने पर राजस्व बढाने के लिए शराबबंदी की समीक्षा कर पाबंदियों के साद शराबबंदी समाप्त करने की भी चर्चा तेज हो गयी है।
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