कबीर साईं मंदिर में सत्संग:मानव मात्र से प्रेम करने की सीख  देते हैं कबीर साहेब : ब्रजेश मुनि

पटना,22 सितम्बर। कबीर पंथी आश्रम मीठापुर में गुरुवारीय सत्संग का आयोजन महत ब्रजेश मुनि  के सानिध्य में आयोजित हुआ । इस अवसर पर कबीर साई मन्दिर में संतों के बीच पधारे सोनबरसा के विधायक एवं  बिहार विधानसभा के  जदयू के सचेतक बनने पर रत्नेश सदा ने सद्गुरु कबीर साई के दरबार में शीश झुकाने के बाद साधु संतों से आशीर्वाद लिया। अपने उदगार में कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब ने सम्पूर्ण समाज को सत्य, अहिंसा, एकता, आध्यात्मिकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा यदि तू उद्धार चाहता है तो जीवों दया कर आत्म पूजा को आत्मा में धारण करने का मार्ग बताया। सद्गुरु भक्ति के समान कोई दूसरी भक्ति नहीं है। और  सत्संग करते हुए आश्रम के महंत बृजेश मुनि क ने कहा- कबीर साहब की प्रगट वाणी है - प्रेमन बाड़ी उपजे प्रेम न हाट बिकाय राजा प्रजा जेहि है रुचै सीस देइ ले जाय।
सदगुरु कबीर ने कहा था- प्रेम  कोई खेत में नहीं उपज होता है न कहीं बाजार में बिकता है राजा हो या रंक हो अपने सिर देने के  बाद भी प्रेम मिलता हो तो भी लेना चाहिए।नाना प्रकार के प्रपंच में पड़कर मनुष्य काम, क्रोध लोभ, मोह, अहंकार, आशा, तृष्णा में  पड़कर बेचैन हो गया है । मानव मात्र को प्रेम करना चाहिए चौरासी लाख योनियों में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है। केवल मनुष्य समझ सकता है अपना पराया क्योंकि उसके अंदर में ज्ञान होता है । अज्ञानतावश इस ज्ञान से वंचित रहता है।
इस अवसर पर  सहारनपुर से पधारे महंत सतस्वरुप  शास्त्री, डॉक्टर प्रभाकर दास, काशी के संत अशोक दास हंस, संत श्री विवेक मुनि, संत श्री महेश जी, दर्शन बाबा ने भी साधु संगति की। गजेन्द्र झा, रामदेव साह रूबी देवी दुलारी देवी आदि महिलाओं ने  कबीर साईं के भजन गाकर भक्ति भाव का अलख जगाया।

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