Bihar Cabinet Expansin: टला,विधायकों में मंत्री बनने की होड़ और असंतोष

अरुण कुमार पाण्डेय 
पटना,19 फरवरी। बिहार में नीतीश कुमार  नौवीं बार 28 जनवरी को  सीएम बने हैं ।सीएम सहित नौ मंत्रियों बीच 4 फरवरी को विभागों का बंटवारा हुआ। 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट होने बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के साथ संभावित नामों के भी कयास लग रहे हैं ।अब विस्तार कब होगा? विधायकों में मंत्री बनने की होड़ और असंतोष देख 1 मार्च तक चलने वाले बजट सत्र तक  विस्तार टलने के आसार हैं। अब यह लाख टके का सवाल बना है कि प्रदेश की सभी 40 लोकसभा सीट जीतने का संकल्प पूरा करने के मद्देनजर किन चेहरों को मंत्री बनाकर विभिन्न जाति,वर्ग ,धर्म और क्षेत्र को साधने की कोशिश होगी? विधान परिषद की 11 सीटों के द्विवार्षिक चुनाव में किन नये चेहरा को जगह मिलेगी?

बिहार में सीएम सहित 36 मंत्री बनाये जा सकते हैं। फिलहाल सीएम और दो डिप्टी सीएम सहित नौ मंत्री हैं।  विभागों बंटवारे में जदयू को 19,भाजपा  को 23,हम को 2 और निर्दलीय को एक विभाग मिला है। 27 और मंत्री बन सकते हैं। भाजपा  के 15 और जदयू के13 मंत्री बन सकते हैं। हम को एक और मंत्री मिला तो भाजपा के 13 और मंत्री हो सकते हैं।

फिलहाल मंत्री के नए नामों को लेकर  कयास लगाए जा रहे हैं। जदयू के मंत्रियों और विभाग तो सीएम नीतीश कुमार को ही तय करना है जो पार्टी के भी सर्वेसर्वा हैं। जदयू में अधिसंख्य पुराने ही चेहरा को जगह मिलनै और नए चेहरों की उम्मीद कम जताई जा रही है। वडिप्टी स्पीकर महेश्वर हजारी मंत्रिमंडल में जगह पाने या लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक बताये गये हैं। रत्नेश सादा को फिर मौका मिलने पर   भी निगाहें हैं। 
भाजपा के मंत्रियों के नाम और विभाग डिप्टी सीएम एवं प्रेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी केंद्रीय नेतृत्व के परामर्श और सहमति से ही करेंगे। भाजपा में नये चेहरा,अति पिछड़े और  महिला को तरजीह दिये जाने की उम्मीद की जा रही है। तीन से पांच बार के कई विधायकों के  मंत्री बनने की होड़ मे शामिल होना स्वाभाविक है।  
जदयू के संभावित मंत्रियों में अशोक चौधरी,नीरज कुमार, जयंत राज, सुनील कुमार, मदन सहनी, नरेन्द्र नारायण यादव, लेशी सिंह, शीला मंडल के नाम की चर्चा है।संजय झा भी पहले मंत्री थे, लेकिन अब संजय झा को राज्यसभा भेज दिया गया है.
भाजपा के संभावित  मंत्रियों में नीतीश मिश्र, संजय सरावगी, विनोद नारायण झा,नीतीन नवीन, नवल किशोर यादव, संजीव चौरसिया,श्रेयसी सिंह, निशा सिंह, नीरज बबलू, जीवेश मिश्रा, रामप्रवेश राय ,दिवेश कांत के नाम चर्चा में है।




बीजेपी की सोच नए चेहरे पर ज्यादा है


राजनीतिक खेला
12 फरवरी को  फ्लोर टेस्ट के पहले प्राय: सभी दलों में विधायकों की बाडाबंदी का अद्भुत नजारा देखने को मिला। राजद,जदयू,भाजपा और कांग्रेस के विधायकों को  फूट से बचाने और एकजुट रखने के लिए पटना के विभिन्न होटलों में ठहरा कर सतत निगरानी होती रही ।फिर भी खेला हो गया। सदस्यता की परवाह नहीं की। राजद के तीन विथायकों ने खुलकर सरकार का साथ दिया और पाला बदल लिया। जदयू और भाजपा के भी तीन-तीन विधायकों ने स्पीकर अवध बिहारी चौधरी को हटाने की मुहिम में शामिल होने की बजाय सदन से गायब रह विपक्ष को साथ दिया।स्पीकर नहीं हटे तब सदन में लौट आये इनमें पांच विधायक सीएम के विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में  वोटिंग की।सीएम ने 129 का बहुमत दिखा दिया। जबकि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 125 और विपक्ष में 112 मत आये थे।

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