93% सफलहेड टीचर्स अभ्यर्थियों को पसंदीदा जिला आबंटन
पटना,04 अप्रैल। बिहार में 35333 प्रधान शिक्षकों के पसंदीदा जिला आबंटन पर उठ रहे सवाल और विवाद पर शिक्षा विभाग ने सख्त एतराज जताया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर शुक्रवार को दो पृष्ठों की विग्यप्ति जारी की गयी है।
93% अभ्यर्थियों को उनके दिए गए विकल्प मिले

93% सफल अभ्यर्थियों को उनके प्रथम, द्वितीय और तृतीय विकल्पों में से कोई एक जिला आवंटित किया गया है। शेष 7% अभ्यर्थियों को कोटिवार सीट उपलब्धता के आधार पर अन्य जिलों में नियुक्त किया गया। जिला आवंटन बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा निर्धारित कोटिवार आरक्षण के तहत किया गया है।
 शिक्षा विभाग ने नवपदस्थापित प्रधान शिक्षकों के लिए जिला आवंटन प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है। कहा गया है कि मेधा सूची और कोटिवार आरक्षण नीति के अनुसार आवंटन प्रक्रिया अपनाई गई है।
 बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने नवपदस्थापित प्रधान शिक्षकों के लिए जिला आवंटन प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है।शुक्रवार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि सभी अभ्यर्थियों को उनके आवंटित जिले में पदस्थापन स्वीकार करना अनिवार्य होगा।बिना किसी ठोस आधार के इस प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।

जिला आवंटन को लेकर उठे सवाल और विभाग की सफाई

 कुछ अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि कम मेधा क्रम वालों को उनकी पसंद का जिला मिला, जबकि उच्च मेधा क्रम वालों को नहीं।अभ्यर्थियों का दावा था कि जिला आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई।इस पर शिक्षा विभाग ने कहा कि यह जिला स्तरीय संवर्ग है, इसलिए कोटिवार स्वीकृत पदों के अनुसार ही नियुक्ति की गई। प्रत्येक अभ्यर्थी को उनकी श्रेणी (सामान्य, ईबीसी, ओबीसी, एससी, एसटी) के अनुसार ही जिलों का आवंटन हुआ।अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती, तो BPSC द्वारा की गई अनुशंसा का क्रम भंग हो जाता।आखिर में कोई भी सामान्य वर्ग का उच्च मेधा क्रम वाला अभ्यर्थी, निम्न मेधा क्रम वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी से वंचित नहीं हुआ। इसी तरह अन्य सभी आरक्षित वर्गों के साथ भी यह नीति लागू की गई।

शिक्षा विभाग के अनुसार, बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित प्रधान शिक्षकों का जिला आवंटन कोटिवार किया गया। सामान्य कोटि के अभ्यर्थियों को उनके मेधा क्रम के आधार पर जिला मिला। EWS (आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग) के अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट लिस्ट के अनुसार जिला आवंटित किया गया। OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) और EBC (अति पिछड़ा वर्ग) के अभ्यर्थियों को उनकी कोटि के अनुसार मेरिट लिस्ट के आधार पर जिला मिला। SC/ST (अनुसूचित जाति/जनजाति) के लिए भी यही नियम लागू किया गया।दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष छूट दी गई, लेकिन अन्य सभी को अपने कोटिवार आवंटन के अनुसार जिला स्वीकार करना अनिवार्य है।

क्या जिला आवंटन को चुनौती दी जा सकती है?

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि जिला आवंटन की प्रक्रिया को चुनौती देना संभव नहीं है।बिना तथ्यों की जानकारी के इस पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता। यदि कोई अभ्यर्थी आवंटित जिला स्वीकार नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति रद्द हो सकती है।इसलिए सभी प्रधान शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने नियुक्ति आदेश के अनुरूप आवंटित जिले में योगदान दें।













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