भाजपा का असली चेहरा उजागर, मृत किसानों के परिजनों को मिले पांच करोड़ मुआवजा : हेमंत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कृषि कानून वापस लेने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने घोषणा को दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद बताते हुए कहा कि पूरी भाजपा यह प्रचार करने में जुटी है कि प्रधानमंत्री किसानों के हितैषी हैं। भाजपा का असली चेहरा उजागर हो चुका है। यह तो वही बात हुई कि पहले गला दबाओ और गला दबाने पर नहीं मरे तो उसे गले लगा लो और बताओ कि हम आपके हितैषी हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा यह मांग करती है कि प्रधानमंत्री तत्काल इस आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों को पांच-पांच करोड़ रुपये बतौर मुआवजा और उन्हें शहीद का दर्जा देने की घोषणा करें। जिन किसानों की मौत इस आंदोलन के क्रम में हुई है, उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाए। आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे और न्यायालयों में लंबित मामले केंद्र सरकार वापस ले। पिछले सवा साल से सड़कों पर अपने बाल-बच्चों के साथ आंदोलन कर रहे किसानों को फसलों की क्षतिपूर्ति के लिए दस-दस लाख रुपये दिया जाए। केंद्रीय कृषि मंत्री को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय का विश्लेषण विशेषज्ञों के साथ चर्चा में सामने आएगा। भाजपा को चुनाव में होने वाले खामियाजा का अहसास हो गया था। यही कारण है कि भाजपा नेताओं की तरफ से केंद्र सरकार को किसानों का हितैषी बताने संबंधी बयान आ रहे हैं। आंदोलनरत अन्नदाताओं के साथ जो व्यवहार हुआ, उसे पूरे देश ने देखा। अब एक प्रोपेगेंडा के तहत भाजपा को किसानों का हितैषी बताने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन भाजपा का असल चेहरा उजागर हो गया है।

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