हिंदू के देवता, मुसलमान के पीर थे संत कबीर-मंहत ब्रजेश मुनि महाराज*

पटना -कबीरपंथी आश्रम मीठापुर के कबीर साई मंदिर प्रांगण में  
 आयोजित कबीर कथा के अंतिम दिवस पर कथावाचक आचार्य गद्दी कबीर पीठ फतुहा के संरक्षक आचार्य मंहथ ब्रजेश मुनी महाराज ने कबीर कथा में सदगुरु कबीर साहेब का प्रसंग बताते हुए कहा- हिंदू के देवता मुसलमान के पीरु थे संत कबीर समाज मैं जो भ्रांति थी कि काशी में मरने से मनुष्य स्वर्ग प्राप्त होता है। लेकिन
सदगुरु कबीर साहेब ने बताया कि यह • भ्रांति है क्योंकि परमात्मा को भजने वाला व्यक्ति चाहे काशी में मरे या मगहर मरे या अपने घर में मरे उन्हें स्वर्ग और मोक्ष जरूर मिलता है।
इसीलिए सतगुरु कबीर साहिब ने - कहा-क्या काशी क्या मगहर उसर, - जो हृदय राम बस मोरा।
जो कासी तन तजै कबीरा, रामे कौन निहोरा ।।
इसलिए सदगुरु कबीर साहेब ने जो समाज में भ्रांतियां थी उसे मिटाने के लिए काशी छोड़ा अपने शिष्यों के साथ संवत 1575 मे माघ शुक्ला एकादशी को मगहर के लिए प्रस्थान किए। वास्तव में सद्गुरु को मगहर का कलंक मिटाना था सद्गुरु ने
उसर मगहर को हरा-भरा करने हेतु आमी नदी को प्रगट किया लगभग दस महीने सद्गुरु मगहर में रहे अंत में सद्गुरु ने अपने हिंदू मुसलमान सभी शिष्यों को अंतिम संदेश सुनाया- प्रेम और सौहार्द का वातावरण बनाए रखने के लिए कहा।पक्षात सद्गुरु कुटीर में प्रवेश आसन पर लेट गए शिष्य ने उन्हें चादर ओढाई द्वार बंद किया शिष्य बाहर आए सभी शिष्य अंतिम क्रिया हेतु विचार करने लगे हिंदू अग्नि संस्कार करना और मुसलमान
दफनाना चाहते थे दोनों ने सतगुरु पर अपना अधिकार बताया वह सदूरु का अंतिम संदेश भूल गए दोनों में युद्ध उन गया उसी समय आकाशवाणी हुई-खोलो परदा हे नहीं मुरदा। यह सुनते ही सब स्तब्ध हो गए उन्होंने अंदर जाकर देखाचादर के नीचे केवल पुष्पों का ढेर था शरीर ब कार नहीं था हिंदू और मुसलमानों ने चादर और लब ब्य फूलों को आधा-आधा बांट लिया हिंदू न्दू शिष्यों ने विधिपूर्वक फूलों की समाधि बान बनवाई मुसलमानों ने कब्र आज भी समाधि और मजार सतगुरु कबीर की अंतिम लीला को गवाही देते हुए को प्रेम और एकता का संदेश देती है। अंतिम
दिवस की कथा में मुख्य अतिथि  रूप में पधारे
राघोपुर के पूर्व विधायक सतीश कुमार यादव ने कहा की
मध्यकालीन युग में सभी संतो में सद्‌गुरु कबीर साहेब श्रेष्ठ थे, उन्होंने दलित पीड़ित जनता की अगुवाई की।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डॉक्टर इंद्रजीत कुमार संत महेश मुनि, संत करसन मुनि,
आयुष मुनि , चंदन कुमार, लालबाबु यादव ,महिला मंडल की प्रधान रूबी देवी,उषा देवी, चन्देश्वर, कुंदन कुमार, आदी ने परिश्रम किये इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति थी।

Top