बिहार के स्कूलों की टाइमिंग बदली,सुबह 06:30 बजे स्कूल लगेगी , अपराह्न 12:10 बजे होगी छुट्टी
 निरंजन

गुरु जी को सुबह 06: 20 बजे पहुंचना होगा विद्यालय।
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यह व्यवस्था 10 जून से 30 जून तक लागू रहेगी , निदेशक ने जारी किया आदेश।
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अपर मुख्य सचिव केके पाठक का लंबी छुट्टी पर जाने के बाद उनका आदेश बदला जा रहा है। नए अपर मुख्य सचिव के रूप में एस.सिद्धार्थ के अतिरिक्त प्रभार लेने के बाद कई आदेशों की समीक्षा कर रहे हैं। इसी समीक्षा के क्रम में ग्रीष्मकालीन स्कूल के दौरान सुबह 06:00 से अपराह्न 01:30 बजे तक स्कूल में रहने के आदेश पर विचार किया गया और इसे जनहित में बदल दिया गया है। अब स्कूल सुबह 06:30 से शुरू होगी और उसके 10 मिनट पहले शिक्षकों को आना होगा यानी शिक्षक और प्रधानाध्यापक को सुबह 06:20 तक स्कूल आना होगा। वहीं अपराह्न 01.30  बजे के बजाय शिक्षक अपराह्न 12:10 के बाद स्कूल छोड़ सकते हैं। अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक सन्नी सिन्हा ने आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश 10 जून से 30 जून तक के लिए जारी किया गया है। 
     उल्लेखनीय है कि इस बार बिहार के सरकारी स्कूल में केके पाठक के निर्देश पर 15 अप्रैल से 15 मई तक गर्मी छुट्टी दी गई थी। छुट्टी के दौरान भी शिक्षकों को स्कूल नियमित रूप से आना पड़ा था। पुनः 16 मई से स्कूल खोला गया। इसमें सभी शिक्षकों को सुबह 06:00 से अपराह्न 01:30 बजे तक स्कूल में रहना अनिवार्य कर दिया गया था। केके पाठक के इस आदेश पर काफी बवाल हुआ था। इस बीच भीषण गर्मी और लू की वजह से काफी संख्या में छात्र-छात्रा बेहोश हो गए थे वहीं कई शिक्षक भी बीमार पड़ गए थे। इसके बावजूद केके पाठक ने स्कूलों में छुट्टी नहीं की थी। इससे नाराज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीधे मुख्य सचिव को स्कूलों में छुट्टी करने का निर्देश जारी किया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने केके पाठक और सभी जिलाधिकारी को पत्र लिखकर 08 जून तक छुट्टी  करने का आदेश जारी कर दिया था। इस बीच केके पाठक लंबी छुट्टी पर चले गए। वे तीन जून से 30 जून तक छुट्टी पर रहेंगे। उनके छुट्टी पर जाने के बाद एस. सिद्धार्थ को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का प्रभार दिया गया है। केके पाठक के कई फैसले को एस.  सिद्धार्थ पलट रहे हैं। अब देखना है कि 30 जून के बाद छुट्टी से वापस आने पर केके पाठक को फिर से शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलती है या फिर उनसे यह विभाग छीन लिया जाता है। अगर उन्हें फिर से शिक्षा विभाग की जिम्मेवारी मिलती है तो वे आगे क्या कदम उठाएंगे , यह उनपर ही निर्भर करेगा।

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