सेहत: बरसाती रोगों से बचाने में कारगर है होम्योपैथी


बरसाती मॉनसून में बीमारियां बिना बुलाए मेहमान की तरह दस्तक देती है। बरसात के मौसम  संभवत ऐसा मौसम है जबकि चिकित्सकों को सर्वाधिक व्यस्त रहना पड़ता है इसका कारण यह है कि इस मौसम में लोग अक्सर छोटी-मोटी बीमारियों के शिकार तो हो ही जाते हैं साथ ही कभी-कभी पीलिया जैसे जानलेवा रोग से भी ग्रस्त हो जाते निश्चय ही हमें इस मौसम में होने वाली बीमारियों के संबंध में जानकारी होनी चाहिए,साथ ही यह भी पता होना चाहिए कि इस मौसम में हमें क्या-क्या सावधानी  रखनी चाहिए। बरसात का मौसम बहुत सुहावना होता है भला इससे रिमझिम फुहार किसे अच्छी नहीं लगती परंतु इस मौसम में विभिन्न बीमारियां लोगों को सताने लगती है छोटे-छोटे बच्चे इसके शिकार ज्यादा होते हैं सर्दी जुकाम टॉन्सिल का बढ़ना, बुखार जौंडिसल,बच्चों में निमोनिया, पतले दस्त होना, सिर दर्द,जोड़ों का दर्द, पेट दर्द गैस्ट्रिक इत्यादि बीमारियां आसानी से लोगों को अपने चपेट में ले लेती है,लोग परेशान हो जाते हैं जरा सा सर्दी खांसी हुई की एंटीबायोटिक दवा  बिना चिकित्सक के  फटाफट देने लगते हैं इन दवाओं का कितना कुप्रभाव शरीर पर होता है इसका ध्यान नहीं रखते परिणाम स्वरूप एक बीमारी ठीक होने के बाद दूसरी शुरू हो जाती है 
होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति से  लक्षण समूह के आधार पर चयनित औषधि का कोई कुप्रभाव (साइड इफेक्ट )शरीर पर नहीं पड़ता है और रोग तीव्र गति से ठीक होता है कुछ लोगों में गलत धारणा बनी हुई है कि होमियोपैथी दवा धीरे-धीरे काम करती है इन दवाओं का सेवन करते समय लहसुन, प्याज, अदरक, मिठाई ,खटाई आदि नहीं खाना पड़ता है जबकि सच्चाई इससे परे है। होमियोपैथी दवा  बहुत ही तीव्र गति से रोग को  समूल नष्ट करती है, जब खाने वक्त किसी भी परहेज की कोई आवश्यकता नहीं होती है हां रोक के अनुसार खान-पान में परहेज किया जाता है जैसे किसी को सर्दी खांसी बुखार है दही, केला, अमरुद, आइसक्रीम इत्यादि परहेज रखना ही होगा।
 अब हम कुछ सामान्य रोग एवं उनकी होमिपैथिक चिकित्सा की बात करते हैं हालांकि इसमें किसी लोग का कोई फिक्स मेडिसिन नहीं होता है लक्षण के अनुसार भिन्न -भिन्न रोगियों की दबाएं भिन्न-भिन्न होती है, बरसाती  मौसम का सबसे सामान्य रोग सर्दी जुकाम होता है पानी की तरह पतली सर्दी, आंखों में जलन के साथ लगातार कम मात्रा में बार-बार पानी का प्यास होने लगने पर। आर्सेनिक एल्बम 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए । आंख एवं नाक से लगातार पानी की तरह गर्म श्राव, सिर भारी, बुखार जैसा मन किंतु बुखार नहीं तथा लगातार छींक आ रही है तो एलियम सेपा 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।साथ-साथ नेट्रम सल्फ 30 एक बूंद तीन बार सेवन करना चाहिए। बरसात के मौसम में लगातार नमी वाली जगह में रहने से कोई बीमारी हो  गई हो डल्कामारा 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए। सूखी खांसी के साथ तेज  प्यास एवं बुखार रहने पर ब्रायोनिया 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए। बुखार के साथ छटपटाहट एवं जीभ का अगला भाग लाल  तो रस टॉक्स 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए। टॉन्सिल बढ़ा  हो  एवं बुखार भी हो तो बेलाडोना 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए। बच्चों को न्यूमोनिया होने पर लक्ष्ण के अनुसार एकोनाइट नेपल्स,ब्रायोनिया , इपिकाक,एन्टीमटार्ट ,स्पोंजिया टोस्टा,लाइकोपोडियम आदि देना चाहिए। गैस्टिक अफारा परंतु डकार होने पर आराम नहीं मिलने पर चाइना 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए , डकार होने पर आराम मिलने पर कार्बोवेज 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना। बरसात में फोड़ा फुंसी होने पर भाई को पाईरोजेनम 200एक बूंद एक बार रोज लेना चाहिए। बरसाती मौसम में झुंड़ के झुंड  शरीर में होने पर आर्निका माउंटेना 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना। बरसाती मौसम में फोड़े की शुरुआत,फोड़े के साथ बुखार बेलेडोना 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए। बरसाती फोड़े पर मवाद होने पर हिपर सल्फर 1एक्स दो-दो घंटे पर सेवन करें। बरसाती मौसम में पित्ति होने पर रसटक्स 30एक बूंद तीन बार रोज लेना।चकत्ते चकत्ते पित्ति होने पर एपिस मेल 30 एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।
 कोई भी दवा होमियोपैथी चिकित्सक के सलाह से ही इस्तेमाल करें।
        डॉ लक्ष्मी नारायण सिंह
        होमियोपैथी अस्पताल
         फतुहा, पटना (बिहार)

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