बिहार में नई कृषि नीति और तीन कृषि रोडमैप से कृषि क्षेत्र में आया क्रांतिकारी बदलाव: संजय कुमार झा
पटना, 22 सितंबर।
बिहार में मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू नई कृषि नीति और तीन कृषि रोडमैप से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। इससे प्रमुख अनाजों के साथ-साथ दूध, अंडा, मांस, मछली के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। इससे ग्रामीण आबादी के जीवन में गुणात्मक बदलाव आया है। यह कहना है बिहार सरकार के जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्री संजय कुमार झा का। श्री संजय कुमार झा गुरुवार को ज्ञान भवन पटना में बिहार पॉल्ट्री एंड एक्वा एक्सपो के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने एक्सपो के विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण कर पॉल्ट्री एवं मत्स्य पालन संबंधी नई तकनीकों और उत्पादों की जानकारी भी ली।

श्री संजय कुमार झा ने कहा कि कृषि क्षेत्र का विकास  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शुरू से शीर्ष प्राथमिकता रही है। माननीय नेता नीतीश कुमार ने पहले केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए भारत सरकार की नई कृषि नीति तैयार की थी। फिर बिहार का मुख्यमंत्री बनने पर राज्य सरकार की नई कृषि नीतियों की घोषणा की थी। इसमें कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड (एपीएमबी) को भंग करने, कृषि शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देने, बिहार राज्य बीज निगम को पुनर्जीवित करने, पूरे राज्य में मिट्टी जांच केंद्रों और बीज जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना सहित कई कदम उठाये गये थे। बिहार के विकास की रफ्तार बढ़ाने में कृषि क्षेत्र में हुए सुधारों का अहम योगदान रहा है। 
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार में कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्रों की औसत वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक रही है। बिहार में कृषि उत्पादन बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से वर्ष 2007 से ही कृषि रोडमैप का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक तीन कृषि रोडमैप को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारने के कारण बिहार में कृषि क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। इस दौरान चावल, गेहूं और मक्का का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए बिहार को केंद्र सरकार से पांच बार प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार हासिल हो चुका है। 
श्री संजय कुमार झा ने बताया कि राज्य में चावल उत्पादन वर्ष 2005-06 में 37.08 लाख मीट्रिक टन था, जो 2021-22 में बढ़ कर 70.73 लाख मीट्रिक टन हो गया। इस अवधि में गेहूं उत्पादन 28.22 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 66.27 लाख मीट्रिक टन, जबकि मक्का उत्पादन 15.19 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 35.31 लाख मीट्रिक टन हो गया। वर्ष 2005-06 में सब्जियों का उत्पादन 76.54 लाख मीट्रिक टन था, जो 2021-22 में बढ़ कर 195.84 लाख मीट्रिक टन हो गया। 
श्री संजय कुमार झा ने कहा कि बिहार की लगभग 85 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। खेती के साथ-साथ पशुधन और मत्स्यपालन प्रदेश की ग्रामीण आबादी की आजीविका और खाद्य सुरक्षा का एक प्रमुख साधन है। पशुपालन एवं मत्स्यपालन संबंधी गतिविधियों के विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण संस्थाओं की भी स्थापना की गई। वर्ष 2016-17 में पटना में पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। इसी विश्वविद्यालय के अधीन 2018 में किशनगंज में स्थापित कॉलेज ऑफ फिशरीज से प्रदेश के युवा मत्स्यपालन में डिग्री और विशेषज्ञता हासिल कर रहे हैं।
श्री संजय कुमार झा ने कहा कि राज्य में दूध का वार्षिक उत्पादन 2008 में 57.67 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़ कर 2020-21 में 115.02 लाख मीट्रिक टन हो गया। अंडा का वार्षिक उत्पादन 2016-17 के 111.17 करोड़ से बढ़ कर 2020-21 में 301.32 करोड़ हो गया। इसी तरह मत्स्य उत्पादन वर्ष 2021-22 में रिकार्ड 7.62 लाख मीट्रिक टन हुआ, जो वर्ष 2010-11 में सिर्फ 2.88 लाख मीट्रिक टन था।
उन्होंने कहा कि बिहार में दूध, अंडा, मछली आदि का उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ इसकी खपत भी तेजी से बढ़ी है। इससे राज्य के लोगों में पोषण का स्तर बेहतर हुआ है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है। साथ ही दूध, अंडा और मछली के उत्पादन एवं विपणन ने बड़ी संख्या में लोगों को स्वरोजगार का अवसर भी दिया है।
श्री संजय कुमार झा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का सपना है कि देश-दुनिया की हर थाली में कोई-न-कोई बिहारी उत्पाद/ व्यंजन पहुंचे। उनके इस सपने को साकार करने में स्वास्थ्यबर्धक मिथिला मखाना सबसे बड़ी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। इसे मिथिला मखाना नाम से ज्योग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन टैग (जीआई टैग) मिल जाने से निश्चित रूप से इसमें मदद मिलेगी। माननीय मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिहार सरकार के संबंधित विभागों और बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मखाना के लिए जीआई टैग हासिल करने की प्रक्रिया पर पिछले तीन वर्षों से काम चल रहा था। 
उन्होंने कहा कि मिथिला में मखाना की खेती को बढ़ावा देने और देश-विदेश में इसकी ब्रांडिंग तथा बिक्री बढ़ाने के माननीय मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिहार सरकार द्वारा कई स्तरों पर निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई मखाना विकास योजना के तहत किसानों के समूह बना कर क्लस्टर में उत्पादन और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, मखाना के उच्च प्रजाति के बीजों को अपनाने पर अनुदान दिया जा रहा है। इससे पहले केंद्र में कृषि मंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने वर्ष 2002 में दरभंगा में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान संस्थान की स्थापना की थी। राज्य सरकार के समेकित प्रयासों का सुफल है कि केंद्र सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत इस वर्ष मखाना के उत्पादन एवं विकास के लिए दरभंगा जिले को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया। अब माननीय मुख्यमंत्री के निर्देश पर जलजमाव वाले क्षेत्रों में मखाना-सह-मत्स्यपालन का एक बेहतर मॉडल विकसित करने पर भी काम चल रहा है। बिहार के बेकार पड़े चौर तथा जलजमाव वाले क्षेत्रों का उचित विकास कर वहां मखाना के साथ मछली पालन के बेहतर मॉडल अपना कर किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के साथ-साथ स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सकता है। 
जल संसाधन मंत्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के दूरगामी जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत बिहार के सभी जिलों में जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।  साथ ही खेती की लागत कम करने के लिए सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है और कृषि उपकरणों पर विशेष अनुदान दे रही है। माननीय मुख्यमंत्री के सात निश्चय 2 में एक अति महत्वाकांक्षी घोषणा की गई है- वर्ष 2025 तक राज्य के हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की। इसके लिए जल संसाधन सहित पांच विभागों द्वारा राज्यव्यापी सर्वेक्षण के उपरांत चयनित योजनाओं पर काम किया जा रहा है। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचने से हर खेत में दो से तीन फसल लेना संभव होगा, जिससे कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आयेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
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