समाज के प्रति एक अनूठी पहल
श्री नित्यानंद पांडेय, जहानाबाद , बिहार
वर्तमान पता एवं कार्य- स्थल ( सुरत ) की समाज के प्रति एक अनूठी पहल 
--नारी का अपमान यानि मां का अपमान
नारी का अपमान यानि देवी का अपमान
नारी का अपमान यानि बहू, बेटी,बहन एवं समस्त अस्तित्व का अपमान
इस सब का एकमात्र कारण है - दहेज
- दहेज लेना और देना अपराध है- 
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 --जिसके परिणामस्वरूप समाज में घटित घटनाओं के जिम्मेदार राक्षसों को दण्डित करने का कोई विचार आपके मन में आता है?

दहेज उन्मूलन अग्रणियों की सीख से मेरी भी एक पहल --

मैंने तो अपनाया क्या आप अपनाएंगे ------

पिछले हफ्ते मैंने भी अपने सुपुत्र की शादी तय किया है । हमारे समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के दायरे में मेरा भी परिवार आता है। हैसियत के मुताबिक हम भी करोड़ दो करोड़ दहेज लेने की श्रेणी में आते हैं साथ में गाड़ी , गहने तथा प्रसंग के दौरान अन्य खर्चे भी। पूरी लिस्ट देने की जो परंपरा है दे सकता हूं।
जहां तक हमारे संबंधी जिनके साथ रिश्ते बन रहे हैं वो भी कितना बड़ा भी दहेज देने में समर्थ हैं और कई गुना ज्यादा हमारे से हैसियत रखते हैं। परंतु, हमने इस परम्परा से अपने आपको दूर रखा है। मेरे दोनों बच्चों की शादी के दौरान हमारी यही धारणा रहेगी।
रिश्ते हमारे पास कई आए । कुछ लोग अपनी अच्छी बच्चियों के लिए भी रिश्ते के लिए अपनी हैसियत के मुताबिक वो नहीं आ सके।इस डर से कि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। जबकि हमें कोई एतराज़ नहीं था। 
मेरा जहां तक मानना है कि बहू का चयन करना  एक स्वाभाविक प्रक्रिया होनी चाहिए और मैंने अपने सुपुत्र के लिए वही किया। उसके लिए मैंने वाराणसी के एक MBA बहू जो अमेरिका के टाॅप कम्पनी में भारत के ब्रांच में सीनियर एसोसिएट पोस्ट पर कार्यरत हैं साथ ही साथ अपने पढ़ाई के दौरान हमेशा अव्वल रही है । मैंने वो बहू का चयन किया है। परंतु एक शर्त पर जिसमें कोई दहेज तथा डिमांड नहीं होगा। मुझे इस शब्द से नफ़रत है। मुझे भी इसका अनुभव है।
पुत्र मेरा है तो मुझे भी उसकी खुशी में ख़र्च करने का सौभाग्य है फिर दहेज के पैसे पर खुशियों का क्या मायना।
मेरी आप सबों से जो मेरे समाज के हैं तथा उन सारे प्रदेश जो दहेज की परम्परा पर समर्थन करते हैं, उनसे गुजारिश है कि नारी का सम्मान यानि कि साक्षात देवी का सम्मान है। हर घर में मौजूद बहू -बेटी ,मां , चाची, मौसी, बुआ में देवी का दर्शन का सौभाग्य हम सभी को नियमित मिलता है उसका अनादर तथा तिरस्कार  हम कैसे कर सकते हैं। यदि मेरा ये लेख आप तक पहुंचता है तो कृपया इसे आगे फोरवर्ड करें जिससे इस पहल पर अमल करने की प्रेरणा मिले।
निश्चित रूप से यह एक भयावह हमारे समाज का स्वरूप है जिसे हर लोगों को इस परिस्थिति से निबटने के लिए तैयार रहना चाहिए। हमारी बहुत सारी बहनों तथा माताओं को जिल्लत की जिंदगी हमारे सामने झेलनी पड़ती है कृपया आप भी इस मुहिम में समर्थन करें।
हो सके तो समाज में हर बेटी का सपना समान रूप से समूह लग्न का आयोजन को बढ़ावा देकर कर सकते हैं। मैंने भी कई वर्षों से समूह लग्न के शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना योगदान दिया है जिसमें से कुछ तस्वीरें आपको नीचे इस लेख के साथ संलग्न मिलेंगे। 
इस आयोजन के जरिए बड़े और छोटे में कोई अंतर नहीं रखा जाता। समाज के सभी जोड़ों यदि पचास जोड़ें हैं तो उन्हें एक समान कपड़े, गहने तथा सजावट के साथ साथ खाना पीना एवं आदर सत्कार दिए जाने की प्रक्रिया है जिससे समाज में दहेज तथा नारी प्रताड़ना की हर समस्या से निजात पाए जाते हैं।
*जय हिन्द , जय सनातन*

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