झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन की सरकार के जेएसएससी-सीजीएल समेत 22 परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को हेमंत सोरेन की सरकार के जेएसएससी-सीजीएल समेत 22 परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी हैl
25 दिनों के छात्र-युवा आंदोलन के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने JPSC की परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द किए जाने का आदेश दिया धा।
सरकार के आदेश के खिलाफ दायर अलग-अलग याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. गुरुवार की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अदालत में याचिका  दायर करने वालों को बड़ी राहत देते हुए सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार (18 अगस्त) को अधिसूचना जारी कर झारखंड लोक सेवा आयोग और एक बाहरी एजेंसी की ओर से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे.
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के विरोध में आंदोलन के 25 वें दिन सरकार मांग मानी थी। 
उधर हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर करने वाले अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना एकतरफा तरीके से परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान दे चुके हैं। ऐसे में सरकार के फैसले से उनकी नौकरी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।
अभ्यर्थियों का ये भी कहना है कि अगर जांच में किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को बिना जांच और सुनवाई नौकरी से हटाना सही नहीं है। उनका दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट में स्थान हासिल किया और उसके बाद नियुक्ति मिली।
झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है।
कोर्ट ने दोनों परीक्षाओं से संबंधित राज्य सरकार के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
 हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद JPSC की परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में 15 दिनों के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल कर अपना जवाब देने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जारी उस आदेश पर स्टे दिया, जिसके तहत JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से संबंधित कार्रवाई की गई थी। कोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने के साथ-साथ संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट के आदेश के बाद दोनों परीक्षा मामलों में याचिकाकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से काम पर वापस लिए जाने का रास्ता भी साफ हो गया है।
15 दिनों में जवाब दाखिल करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्धारित अवधि के भीतर काउंटर एफिडेविट के माध्यम से अपना पक्ष रखने को कहा है। अब सरकार को परीक्षा से जुड़े फैसले के आधार और उससे संबंधित रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
हाईकोर्ट के इस आदेश को JPSC परीक्षा विवाद में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला सरकार के जवाब और आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।



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