पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने साहित्य सम्मेलन के

पटना, १९ मई। सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद द्वारा रविवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन सभागार का नव-विकसित अलंकरण-कक्ष लोकार्पित हुआ। इस अलंकरण-कक्ष को, ९२वें वर्षीय कवि और रंगकर्मी श्याम बिहारी प्रभाकर के सम्मान में समर्पित किया गया है। अपने लोकार्पण उद्गार में पूर्व राज्यपाल ने श्री प्रभाकर को गुणवत्तापूर्ण मूल्यवान जीवन का आदर्श उदाहरण बताया।
श्री प्रसाद ने कहा कि उसी व्यक्ति को संसार स्मरण रखता है, जिसका जीवन लोक-मंगलकारी होता है। जिसके जीवन से शिक्षा मिलती हो, जो अनुकरणीय हो, उसकी आयु चाहे जितनी हो, उसके यश की आयु बहुत लम्बी होती है। यह अत्यंत प्रसन्नता-दायक है कि प्रभाकर जी की लौकिक आयु भी लम्बी है और कामना करता हूँ कि इनकी यशो आयु भी बहुत लम्बी हो! इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल ने श्री प्रभाकर को अंग-वस्त्रम प्रदानकर सम्मनित भी किया।
समारोह के विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि प्रभाकर जी का जीवन जिजीविषा और जिवटता का उदाहरण है। एक कलाकार और कवि के रूप में इनकी पर्याप्त ख्याति है। इनका एकल अभिनय आज भी मर्म को स्पर्श करता है। इनकी कविता का मूल-स्वर मानवतावादी है। 
अपने अध्यक्षीय उद्गार में सम्मेलन-अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि प्रभाकर जी दोष-रहित सार्थक जीवन के सुंदर उदाहरण हैं। स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की प्राप्ति किस प्रकार की जा सकती है, यह प्रभाकर जी के जीवनादर्श से सीखा जा सकता है। ३३ वर्ष पूर्व मैंने जिस प्रभाकर जी को देखा था, उसमें आज भी रंच मात्र का परिवर्तन दिखाई देता है। इनके जीवन का प्रत्येक पक्ष अनुशासित, सकारात्मक और कल्याणकारी है। सभी प्रकार के व्यसनों से दूर प्रभाकर जी सादगी,सदाचार और शुचिता के मूर्तमान रूप हैं। ९२ वर्ष की आयु में भी इनकी कर्मठता चकित करती है। एक कवि और रंगकर्मी के रूप में इन्हें आदरणीय स्थान प्राप्त है। साहित्य सम्मेलन ने इनके जीवन-काल में ही सम्मेलन का अलंकरण-कक्ष इनके नाम से समर्पित कर एक वयोवृद्ध कवि-रंगकर्मी के प्रति सम्मान प्रकट किया है।
वरिष्ठ कवि बाबूलाल मधुकर, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, बच्चा ठाकुर, डा अशोक प्रियदर्शी, रेखा मोदी, विनोद कुमार गुप्ता, डा मेहता नगेंद्र सिंह, डा आर के अरुण, डा श्रीकांत शर्मा, के बी राय, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, सुनीता विकास तथा पी एन दूबे ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा श्री प्रभाकर के शतायु होने की मंगल कामना की।
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन में, वरिष्ठ कवि मधुरेश नारायण, डा पुष्पा जमुआर, डा अर्चना त्रिपाठी, मधुरानी लाल, डा ओम् प्रकाश जमुआर, कुमार अनुपम, जय प्रकाश पुजारी, डा शालिनी पाण्डेय, सिद्धेश्वर, नीता सहाय, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, प्रियंका कुमारी, लता प्रासर, सुधा पाण्डेय, अश्विनी कुमार, शुभ चंद्र सिन्हा, कमल किशोर कमल, डा प्रतिभा रानी, इंदु उपाध्याय, सदानन्द प्रसाद, ई अशोक कुमार, राजप्रिया रानी, कमल दास राय, शशिकांत राय, सुनीता रंजन, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी मधुर काव्य-रचनाओं से उत्सव में रस और उल्लास का सृजन किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
सम्मेलन के अर्थ मंत्री प्रो सुशील कुमार झा, ई अवध बिहारी सिंह, बाँके बिहारी साव, श्रीकांत व्यास, शंकर शरण मधुकर, निर्मला गुप्ता, मीरा देवी, प्रेमलता सिंह राजपुत, नम्रता प्रसाद, अर्जुन प्रसाद गुप्ता, अशोक गुप्ता, डा रमाकान्त पाण्डेय, मंजू गुप्ता, प्रेमानंद प्रसाद, डा चंद्रशेखर आज़ाद, आदि प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।

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