बिहार  में पंचायत चुनाव टलने के साथ  विधान परिषद की 24 सीटों के लिए चुनाव भी अधर में लटका
अरुण कुमार पाण्डेय 

बिहार में पहली बार ईवीएम से ही पंचायत चुनाव कराने की नीतीश सरकार की अच्छी जिद के कारण नियत समय पर चुनाव नहीं कराया जा सका । ईवीएम को लेकर केन्द्रीय और राज्य चुनाव आयोग के बीच इस हद तक ठनी कि मामला हाईकोर्ट जा पहुंचा। अंतत: ईवीएम खरीदने का मसला आपसी सहमति से सुलझने के बावजूद  पंचायत निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का पांच वर्षों का कार्यकाल 15 जून को समाप्त होने के पहले चुनाव कराना असंभव हो गया। राज्य चुनाव आयोग की तैयारी धरी की धरी रह गयी। अब त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं पर 15 जून के बाद जनप्रतिनिधियों का नहीं अफसरों का राज कायम हो जायेगा। कोरोना संक्रमण से बचाव और उपचार के उपायों के लिए  जूझ रही सरकार के सामने अब बाढ से बचाव और नियंत्रण की भी तैयारी करने की दोहरी चुनौती है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के कारण न तो छह महीने बाद भी न पंचायत चुनाव और न विधान परिषद की स्थानीय निकाय क्षेत्र की 24 खाली सीटों के लिए भी चुनाव होने की उम्मीद है। स्थानीय निकाय क्षेत्र के सभी सदस्यों का छह वर्षों का कार्यकाल 15 जुलाई तक है। अभी  पांच सीटें खाली हैं।
 बिहार में पंचायत और नगर निकायों का या विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र के का चुनाव नियत समय पर नहीं होने का पुराना रिकार्ड है। 73वां और 74वां संविधान संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और निर्देश पर न सिर्फ पंचायत और नगर निकायों के चुनाव  बल्कि विधान परिषद के स्थानीय  प्राधिकार क्षेत्र के चुनाव कराये गये थे। 
चुनाव आयोग ने निर्वाचित सदस्यों के कार्यकाल को लेकर विधान परिषद के स्थानीय  प्राधिकार क्षेत्र का पिछला  चुनाव  सशर्त कराया था। संविधान में प्रावधान है कि परिषद में प्रत्येक क्षेत्र की एक-तिहाई सीटें प्रत्येक दो वर्षों पर खाली होंगी और इसके लिए द्विवार्षिक चुनाव होंगे।इस प्रावधान की लंबे समय से अनदेखी हो रही है। परिषद में राज्यपाल के मनोनयन कोटा की भी 12 सीटें एक साथ खाली और भरी जा रही है। इसी तरह
स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की सीटों के लिए हो रहा है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है। उसी याचिका के आलोक में पिछले चुनाव के समय आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कोर्ट के फैसला के आधार पर निर्वाचत सदस्योंका कार्यकाल तय होगा। फैसला आने पर लाटरी से  8 सदस्यों का 2 वर्ष, 8 का 4 वर्ष  और 8 का 6 वर्ष कार्यकाल तय होता। बीते छह वर्षों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आने से आगे भी एक साथ सभी 24 सीटों के एक साथ चुनाव होंगे और नये सदस्य भी छह वर्ष बाद ही रिटायर होंगे।
बिहार में आगे पंचायत चुनाव के बाद शहरी निकायों के भी मिनी चुनाव कराने होंगे। 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को शहरी निकाय यथा नगर पंचायत और नगर परिषद का दर्जा दिये जाने और नये नगर निगम का दर्जा दिये जाने से उन सबों का  नये सिरे से चुनाव होंगे। इसके बाद ही विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की 24 सीटों के चुनाव होने की उम्मीद की जा सकती है।



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