जैन समुदाय के विरोध पर झुकी सरकार, झारखंड में पवित्र तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर अब नहीं होगा पर्यटन क्षेत्र
केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन साल पहले जारी किए गए अपने आदेश को वापस ले लिया। पर्यावरण मंत्रालय ने इसे लेकर दो पेज की चिट्ठी जारी की। इसमें लिखा है, इको सेंसेटिव जोन अधिसूचना के खंड-3 के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाती है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियां शामिल हैं। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।
सम्मेद शिखर के मुद्दे पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्र ने सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाने के फैसले पर तत्काल रोक लगा दी है।
सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से जैन समुदाय आंदोलन कर रहा है। इसके खिलाफ कई जैन मुनियों ने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया है। इसमें जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज ने मंगलवार को प्राण भी त्याग दिया था।
सम्मेद शिखरजी जैनियों का पवित्र तीर्थ है। जैन समुदाय से जुड़े लोग सम्मेद शिखरजी के कण-कण को पवित्र मानते हैं। झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित श्री सम्मेद शिखरजी को पार्श्वनाथ पर्वत भी कहा जाता है। ये जगह लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। बड़ी संख्या में हिंदू भी इसे आस्था का बड़ा केंद्र मानते हैं। जैन समुदाय के लोग सम्मेद शिखरजी के दर्शन करते हैं और 27 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले मंदिरों में पूजा करते हैं। यहां पहुंचने वाले लोग पूजा-पाठ के बाद ही कुछ खाते-पीते हैं। 
 
जैन धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों और भिक्षुओं ने मोक्ष प्राप्त किया है। जैन समुदाय के इस पवित्र धार्मिक स्थल को फरवरी 2019 में झारखंड की तत्कालीन भाजपा सरकार ने पर्यटन स्थल घोषित कर दिया। इसके साथ ही देवघर में बैजनाथ धाम और दुमका को बासुकीनाथ धाम को भी इस सूची में शामिल किया गया। उसी साल अगस्त में, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पारसनाथ पहाड़ी को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया और कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की जबरदस्त क्षमता है। अब सरकार के इसी फैसले का विरोध हो रहा था। गुरुवार को केंद्र सरकार ने तीन साल पुराने इसी आदेश को वापस लिया है।
 
विरोध कर रहे जैन समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि ये आस्था का केंद्र है, कोई पर्यटन स्थल नहीं। इसे पर्यटन स्थल घोषित करने पर लोग यहां मांस-मदिरा का सेवन करेंगे। इसके चलते इस पवित्र धार्मिक स्थल की पवित्रता खंडित होगी। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा लोग शत्रुंजय पर्वत पर भगवान आदिनाथ की चरण पादुकाओं को खंडित करने को लेकर भी भड़के हुए हैं।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि झारखंड में श्री सम्मेद शिखर जी’ तीर्थ स्थल ही रहेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में केंद्र सरकार ने पावन तीर्थ सम्मेद शिखर जी की पवित्रता को बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। झारखंड में श्री सम्मेद शिखर जी’ तीर्थ स्थल ही रहेगा। उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। यह स्थल सिर्फ जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए पवित्र स्थान है। इस मुद्दे को लेकर लगातार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का मार्गदर्शन व समाज के अन्य प्रतिनिधियों के संपर्क में था. मैंने उन्हें आश्वस्त किया था, श्री सम्मेद शिखर जी तीर्थ स्थल ही रहेगा। केंद्र सरकार इसे लेकर गंभीर है। हर संभव कदम उठाया जाएगा। अब इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। तीर्थ क्षेत्र में कोई निर्माण कार्य नहीं होगा और स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां होटल, ट्रैकिंग और नॉन वेज पर भी रोक रहेगी। बोर्ड में जैन धर्म के भी प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जैनधर्म ने समाज कल्याण, मानवता व आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। मुझे इसे नजदीक से अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त होता रहता है।

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