राजीव गांधी  की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन और चार अन्य दोषी को  तमिलनाडु की जेलों से रिहा

 पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी  की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन और चार अन्य दोषियों को शनिवार शाम को तमिलनाडु की जेलों से रिहा कर दिया गया। 
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। इसमें राजीव गांधी मारे गए थे। महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें पेरारिवलन, मुरुगन, संथन, रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और नलिनी श्रीहरन शामिल थे। नलिनी के अलावा उसके पति वी. श्रीहरन उर्फ मुरुगन, आरपी रविचंद्रन, संथन, रॉबर्ट पायस और जयकुमार को रिहा किया जाना था। श्रीहरन, संतन, रॉबर्ट और जयकुमार श्रीलंकाई नागरिक हैं। नलिनी और रविचंद्रन तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं।

वेल्लोर में महिलाओं की विशेष जेल से रिहा होने के तुरंत बाद नलिनी वेल्लोर केंद्रीय जेल गई, जहां से पति वी श्रीहरन उर्फ मुरुगन को रिहा किया गया। मुरुगन के अलावा मामले में अन्य दोषी संथन को रिहाई के बाद पुलिस वाहन में राज्य के तिरुचिरापल्ली स्थित विशेष शरणार्थी शिविर ले जाया गया। दोनों श्रीलंकाई नागरिक हैं। इसके साथ ही रॉबर्ट पायस और जयकुमार को पुझाल जेल से रिहाई के बाद विशेष शरणार्थी शिविर ले जाया गया। गौरतलब है कि रिहा किए जाने से एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जेल की सजा काट रहे छह आरोपियों को 31 साल तक जेल में रहने के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया था। इससे पहले इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य दोषी एजी पेरारिवलन को आर्टिकल 142 का हवाला देते हुए रिहा किया था।  

शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा था कि जिस नियम के तहत एजी पेरारिवलन को रिहाई दी गई थी, वो इस मामले में दोषी पाए गए अन्य पर भी लागू होती है। ये सभी आरोपी करीब 31 साल से जेल में बंद थे। बता दें कि राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में आत्मघाती बम धमाके में हुई थी। 


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