बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में इंटर्नशिप कर रहे अनुग्रह नारायण महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं का हुआ विदाई समारोह
भाषा के विद्यार्थियों को शुद्धता के प्रति अधिक सजग रहना आवश्यक:डा अनिल सुलभ 
पटना, 29 नवम्बर। भाषा के विद्यार्थियों को लेखन और व्याख्यान में ही नहीं सामान्य वार्तालाप में भी भाषा की शुद्धता और उच्चारण के प्रति सजग रहना चाहिए। भाषा में भले ही पांडित्य का प्रदर्शन नही हो, किन्तु शुद्धता अनिवार्य शर्त है। अन्य लोगों की त्रुटियाँ, जो भाषा के विद्यार्थी अथवा आचार्य नहीं हैं, क्षम्य हो सकती है, किंतु भाषा के आचार्यों और विद्यार्थियों की नहीं। 

यह बातें शुक्रवार की संध्या बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में संचालित हुए, अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय, पटना के हिन्दी विभाग के विद्यार्थियों के विशेष इंटर्नशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर आयोजित विदायी समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने विद्यार्थियों को शुद्ध उच्चारण और भाषा की शुद्धि सुनिश्चित करने के अनेक सरल उपाय भी बताए और कहा कि आप समाज में भाषा के राजदूत हैं। व्यवहार से ही सिद्धि आती है और दूसरे भी भाषा के प्रति जागरूक होते हैं।

विद्यार्थियों का मार्ग-दर्शन करते हुए 
योगाचार्य और पत्रकार हृदय नारायण झा ने उच्चारण के महत्त्व को समझाया तथा अक्षरों के उच्चारण में प्रयुक्त होने वाले मुख के विभिन्न अंगों के योगाभ्यास भी बताए। जीवन को मूल्यवान बनाने के गुणों और आचरणों के विषय में भी ज्ञान दिया। सम्मेलन के पुस्तकालयमंत्री ईं अशोक कुमार तथा सुप्रसिद्ध पर्यावरण-विद साहित्यकार डा मेहता नगेंद्र सिंह ने भी छात्र-छात्राओं को उदबोधित किया।

आकांक्षा कुमारी, मनीषा, शिवानी, विशाल, मनीष, श्वेता, रूपा, निशु, रौशनी, सलोनी, निक्की, कृष्ण मोहन, निशान्त, कृतिका, रोहन, आशीष, रिया, अमन, नैन्सी, अमन आदि विद्यार्थियों ने भी अपनी अनुभूतियाँ साझा की तथा बताया कि इस इंटर्नशिप से उन्होंने जीवनोपयोगी अनेक शिक्षाएँ प्राप्त की और सभी प्रतिभागी एक परिवार की तरह घनिष्ठ संबंधों से जुड़े तथा यह भी जाना कि सामूहिक शक्तियाँ कार्यों को कितना सरल बना देती हैं। सम्मेलन की प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष डौली कुमारी ने अतिथियों का धन्यवाद-ज्ञापन किया। इस अवसर पर केक काटकर उत्सव को स्मरणीय बनाया गया।

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