झारखण्ड हाईकोर्ट की वकील रजनीश वर्धन की गिरफ्तारी पर  टिप्पणी: ऐसा लगता है इनकी किडनैपिंग हुई है


रांची,09 नवम्बर। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ ने वकील रजनीश वर्धन की गिरफ्तारी को पुलिस द्वारा अपहरण जैसी कार्रवाई मान इस मामले की सुनवाई की है . रांची के एसएसपी और दानापुर के एसपी को जवाब दायर करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही बिहार के गृह सचिव को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी.

 हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश वर्धन की पत्नी की ओर से दायर हैवीअस कॉपस(बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका) पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.  सुनवाई के दौरान पटना एसएसपी,दानापुर एसपी और एसपी वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष मौजूद हुए. झारखंड सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और बिहार सरकार की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा. सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तिथि निर्धारित की है. अगली सुनवाई तक झारखंड सरकार और बिहार सरकार को एफिडेविट के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश झारखंड हाई कोर्ट ने दिया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिवक्ता की गिरफ्तारी के दौरान किसी भी तरह की प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की. अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि अधिवक्ता की किडनैपिंग हुई है.


रात के 10 बजे उठा ले गयी थी पुलिस
झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश वर्धन को पटना पुलिस ने बिना किसी जानकारी के अपने साथ रांची से ले गयी. ये अधिवक्ता रांची के सुखदेव नगर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं. इसकी जानकारी झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार ने दी थी. घटना के बाद अधिवक्ता की पत्नी ने झारखंड हाईकोर्ट में हेबियस कॉपस दायर किया था. अधिवक्ता नवीन कुमार ने इस मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह कोर्ट से किया था.
वकील की पत्नी याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा है कि पटना पुलिस रविवार को बिना किसी पूर्व सूचना के उनके पति को अपने साथ ले गई. इसकी जानकारी न तो अधिवक्ता और ना ही उनके परिजनों को दी गई, ये तक पुलिस ने नहीं बताया कि उन्हें अपने साथ क्यों और कहां ले जाया रहा है.
याचिका में कहा गया है कि उनके पति रजनीश वर्धन को अपने साथ ले जाने के पूर्व पटना पुलिस ने परिजनों को कोई सूचना भी नहीं दी. उन्होंने अपने पति को प्रस्तुत करने की मांग की. हालांकि श्री वर्धन को पटना पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया. बताया जा रहा है कि दानापुर पुलिस गबन के मामले में अधिवक्ता को साथ ले गयी थी. हालांकि यह साफ नहीं हुआ कि गबन में अधिवक्ता की क्या भूमिका है.
इससे वकील समुदाय की गरिमा धूमिल हुई – संजय विद्रोही
झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार ने इस घटना पर कहा था कि इससे वकीलों में रोष है. क्योंकि अचानक रात के 10:00 बजे पुलिस पहुंचती है और उनके साथी वकील को अपने साथ बिना किसी ट्रांजिट रिमांड के ले जाती है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है.
इस मामले पर स्टेट बार काउंसिल के प्रवक्ता संजय विद्रोही ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इस घटना से अधिवक्ताओं में आक्रोश है, और बिना किसी पूर्व सूचना अधिवक्ता की गिरफ्तारी से वकील समुदाय की गरिमा धूमिल हुई है. इसके साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन से आग्रह किया था कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति ना हो और इसके लिए सभी वकीलों को एकजुट होने की जरूरत है.

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