सेहत: वृद्धावस्था  की शिकायतों में होमियोपैथी में है कारगर इलाज

वृद्धों की आम शिकायतों में उपयोगी कुछ औषधियां

1. एसिड फ्लोर 30-बड़ी उम्र वालों को या वृद्धों की शिराये उभरी (distended blood vessels) के शिकार नाड़ियों तथा शिराओ के निष्क्रियता, हाथ पैरों में शोथ। एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

2. *बेलिस पैरेनिस* 30 यह बूढ़े श्रमिकों तथा मालियों आदि की बड़ी अच्छी दवा है। अंगों से ज्यादा काम लेने के कारण उत्पन्न खंजता एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

3. *कार्बोएनी*- 30 निर्बलकारक रोगों के बाद धीमी गति में रक्त संचार, कमजोर जीवनी शक्ति वाले रोगियों के लिए उपयोगी। स्थानीय रक्त संचय जो तापहीन होता है। एक  बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

4. *लाइकोपोडियम*  30  वृद्धावस्था आने के पूर्व ही वृद्धावस्था आ जाना, वृद्ध लोग जिनके चर्म पर पीले धब्बे दिख पड़े। शरीर का वर्ण मटमैला, यूरिक एसिड धातु प्रकृति। पाचन शक्ति की अक्षमता के साथ यकृत की  क्रिया बहुत बिगड़ी।एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

5. *अर्जेंटम नाइट्रिकम*-30 मानसिक व शारीरिक असमंजस्य, नियंत्रण का अभाव, शीतलता वह कंपन के साथ उत्पन्न शिकायतें। एकं बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

6. *कोनियम*- 30 चलना कष्टदायक, कंपन, चलते फिरते समय यकायक शक्ति का लोप, पैरों का दर्द भरा कड़ापन, इस प्रकार की दशा प्राया बुढ़ापे में पाई जाती है जो की निर्बलता उत्साह हिनता, स्थानिक रक्त संचय और आलस्य के रहने के कारण पैदा होती है। अविवाहित वृद्धाओ, आजीवन कुंवारा रहने वाले लोगों के उपसर्गों में उपयोगी दवा। एकं बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

7. *सिकेलि कार्नुटम* 30 -यह उन वृद्धों के लिए लाभदायक औषधि है जिनकी त्वचा झुर्रियां भरी, पतली हो, दुबली पतली वृद्ध स्त्रियां। दुर्बलता, दुश्चिंता, सुख दे जाना, इतने पर भी क्षुधा या प्यास ज्यादा लगती है।एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।


8. *बैरायटा कार्ब*-30 मन व शरीर से दुर्बल, बौने, बड़े पेट वाले व्यक्ति जिन्हें चाहे जब जुकाम लग जाती है। शीतकाल। वृद्धावस्था में प्रोस्टेट ग्रथि का बढ़ जाना,अण्ड काठिन्य। कान में कर कर की आवाज। सर्दी जुकाम के साथ टॉन्सिल प्रदाह।एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

9. *एल्युमीना*30-ऐसे वृद्ध जिनमें जैव ताप की कमी रहती है आठवां जो असमय ही बुड्ढे व शिथिल हो गए हो।

10.*फायटोलैक्का*-30।वृद्ध, जिनका हृदय दुर्बल हो उनको कोस्ठबद्धता। एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

11. *नेट्रम सल्फ -*200 सवेरे का पतला अतिसार, वायु सरने के साथ स्वयं निकल पड़ना।

12. *गैम्बोजिया* 30-ग्रीष्म ऋतु मे प्रचुर, जल या पतला अतिसार, खासकर वृद्धों को।एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

13. *एलोज*30-थके हुए, पुराने शराबी जो कफ प्रधान प्रकृति के होते हैं, अपने से ही नाराज वह असंतुष्ट रहते हैं तथा कटीवात को दुख भोकते रहते हैं। एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

12. *काली फास*200-आवेश सीमा से अधिक कार्य करना और चिंता। जीवनी शक्ति हीनता वह क्षयजनित दशा।श्रान्त, दुर्बल थके हुए व्यक्ति में यह दवा उसके दौबर्ल्य, मानसिक व शारीरिक अबसन्नता को दूर करने में नवजीवन का संचार कर देती है।एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

13. क्यूरारी- 30,=बुड्ढों में जैवरस क्षय के कारण उत्पन्न दुर्बलता। एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

14. *हाइड्रास्टिस* 30-सहज में ही थक जाने वाले बुड्ढे, जिनमें बहुत दुर्बलता रहती है। उठने के लिए हाथों का सहारा लेना पड़ता है। बुड्ढ़ो का वायुभुजनली प्रदाह, सुखी कर्कश खांसी। एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

15. *सेलेनियम*20 -वृद्धावस्था में सहज शारीरिक मानसिक अवसन्नता आ जाना। मूत्राशय -मूख शायरी ग्रंथि प्रवाह और रतिक्रिया हिनता, रतिलालसा बढ़ी पर सामर्थ्य घंटा। वीर्य टपकना, प्रोस्टेट ग्रंथि सिरस टपकना। एक बूंद तीन बार रोज लेना चाहिए।

16. *एसिड फ्लोर* 30-वृद्धावस्था में पांवों में शोथ आ जाना। एक बूंद तीन बार रोज लेना।
 नोट -कोई भी दवा चिकित्साकों की  सलाह से ही इस्तेमाल करें
           डॉ लक्ष्मी नारायण सिंह
           होमियोपैथी अस्पताल
           फतुहा, पटना (बिहार)
           मो 9204090774

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